Mukesh Shekhawat
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Published Poems (79)
मौत की राजधानी
ये कैसा 'कोहरा' है जो अब छंटता नहीं,
सूरज भी अब इस शहर में निकलता नहीं।
हवाओं में यह कैसी ज़हर की मिलावट है,
साँस लेना भी अब तो, एक बगावत है।
सु...
दर्द का कोई बाज़ार नहीं
हुनर लफ़्ज़ों का बाज़ार में बिक सकता है बेशक,
मगर एहसास का दुनिया में कोई बाज़ार नहीं होता।
ये वो दौलत है जो रूह के जलने से मिलती है,
शायर कभी साँच...
शायरी की दुकान नहीं होती
लफ़्ज़ों को जोड़ना तो बस एक हुनर है दुनिया का,
मगर याद रखना, एहसास की कोई दुकान नहीं होती।
कलेजा चाहिए होता है लफ़्ज़ों में आग भरने को,
हर किसी के मुँ...
आखिर कौन हो तुम?
मेरे दिल में गूँजता हुआ, एक सवाल हो तुम,
हकीकत हो मेरी, या सिर्फ एक खयाल हो तुम।
कभी लगता है कि सदियों पुरानी पहचान है तुमसे,
कभी लगता है कि बिल्कु...
जीना सीख लिया
ठोकरें खाकर हमने सँभलना सीख लिया,
भीड़ में रहकर भी अकेले चलना सीख लिया।
कोई सुनता नहीं यहाँ चीखें किसी के दिल की,
हमने अब अपने दर्दों को सहना सीख...
भरोसा मर गया
वो शख्स जो कभी जान था, दिल से उतर गया,
जब काम निकल गया, वो वादे से मुकर गया।
काँच की तरह सँभाल के रखा था रिश्ता हमने,
एक ठेस लगी और सब कुछ बिखर ग...
छोड़ दिया
हमने अब लोगों को मनाना छोड़ दिया,
हर बात पर सफाई देना और बताना छोड़ दिया।
परख लिया है हमने इस मतलबी ज़माने को,
अब गैरों को अपना बनाना छोड़ दिया।
...
किरदार निभाना पड़ता है
दर्द दिल में हो मगर होंठों से मुस्कुराना पड़ता है,
इस दुनिया के डर से अपना ग़म छुपाना पड़ता है।
यहाँ कोई नहीं समझता खामोशियाँ किसी की,
हाल-ए-दिल ल...
मिट्टी का वजूद
उम्र गुज़ार दी हमने मकान सजाने में,
वक़्त ही न मिला खुद को बसाने में।
पेट की भूख ने ये कैसा हुनर सिखा दिया,
खिलौना बन गया इंसान रोटी कमाने में।
...
काँच का तोहफा न देना कभी
काँच का तोहफा न देना कभी, रूठ कर लोग 'तोड़' दिया करते हैं,
जो बहुत अच्छे हों, उन्हें अक्सर लोग 'छोड़' दिया करते हैं।
तब तक ज़िन्दगी चाहिए।
मुझे तेरा साथ ज़िन्दगी भर नहीं चाहिए,
बल्कि जब तक तू साथ है, तब तक ज़िन्दगी चाहिए।
हजारों महफिलें
हजारों महफिलें हैं और लाखों मेले हैं,
पर जहाँ तुम नहीं, वहाँ हम अकेले हैं।
ज़रूरी नहीं
ज़रूरी नहीं कि इश्क़ में बाहों का सहारा मिले,
किसी को जी भर के महसूस करना भी मोहब्बत है।
फुर्सत
फुर्सत मिले तो कभी हम से भी मिल लेना,
बड़ी फुर्सत से तुम्हारी याद में उदास बैठे हैं।
दुश्मनी
एक नाम क्या लिखा तेरा साहिल की रेत पर,
फिर उम्र भर हवा से मेरी दुश्मनी रही।
अलफ़ाज़
अलफ़ाज़ के कुछ ज़ायके ज़ुबाँ पे रहने दो,
कुछ बातें ऐसी भी हैं जो खामोश अच्छी हैं।
गुमशुदा हो गया
मैं खुद को ढूँढने निकला था, गुमशुदा हो गया,
ये कैसा सफ़र था, जो खुद से ही जुदा हो गया।
बहुत सँभल के चला था मैं ज़िंदगी की राह में,
ज़रा सी आँख क्या...
ज़माने बदल गए
बड़ी खामोशी से वो रिश्ते बदल गए,
हम वही रहे, मगर ज़माने बदल गए।
जिन्हें कहते थे हम अपनी ज़िंदगी कभी,
देखते ही देखते उनके ठिकाने बदल गए।
वक़्त की आ...
संभाल रखा है
तेरी यादों को दिल में बसा रखा है,
हमने खुद को दुनिया से छुपा रखा है।
हवाओं से कह दो कि ज़ोर न लगाएँ,
एक चिराग-ए-उम्मीद जला रखा है।
वो आएंगे शायद इ...
रुबाई
वो ख्वाब था बिखर गया, ख्याल रह गया,
दिल में बस एक दबे पाँव सवाल रह गया।
हमने तो चाहा था उन्हें ज़िंदगी से बढ़कर,
अब उनके जाने का बस एक मलाल रह गया।
एहसास
यहाँ हर आदमी अंदर से कुछ टूटा है,
किसी के दर्द को बस प्यार से बुलाकर तो देखो।
जो गिर गया है, उसे तुम हँसी में टालो मत,
ज़रा सा हाथ बढ़ा कर, उसे उ...
सिगरेट के धुएँ का अक्स
वो जा चुकी है, मैं सब कुछ फ़ना कर रहा हूँ,
मैं जल रहा हूँ और सबको धुआँ' कर रहा हूँ।
ये राख 'बिखरी' नहीं है, ये 'क़िस्सा' है मेरा,
मैं अपनी 'उम्र'...
इंसानियत का आसरा
किसी के ज़ख़्म की कोई दवा होना चाहिए,
बुरे वक़्तों में कोई आसरा होना चाहिए।
ये जो इंसान हैं, टूटे हुए हैं अंदर से,
इन्हें छूने को लहजा नरम होना च...
बाज़ार
यहाँ 'ज़मीर' भी 'बाज़ार' में सरे-आम बिकता है,
वो 'सच' क्या बोलेगा, जिसका 'ईमान' बिकता है।
तू 'मंदिर-मस्जिद' में 'रब' को ढूँढता है 'नादान',
वहाँ त...
मरघट का सच
जो 'माल' गिनता था, उसका 'ख़याल' जल गया।
जो 'मैं' का 'जाल' बुना था, वो 'जंजाल' जल गया।
मरघट का सच
वो 'ऊँची ज़ात' की बातें, वो 'ऊँचा' सर उसका,
चिता ...
मरघट का पाखंड
जो घर पे फ़र्ज़ न अपना निभाने निकले,
वो झूठे आँसू नदी में बहाने निकले
ज़मीन बाँट चुके जो अभी से आपस में,
वही चिता पे हैं 'रिश्ते' जताने निकले।
...
आदत
चेहरे पे चेहरा हर घड़ी चढ़ाने की आदत है।
दुनिया को झूठे ख़्वाब ही दिखाने की आदत है।
जब काम हो तो पास वो आ जाने की आदत है।
मक़सद हुआ पूरा, तो कतरा...
मरण
रोज साँसां की किस्तां नै भरता रहूँ,
इस जिन्दगी का कर्जा उतरता कोन्या।
घुट-घुट कै मर जाऊँ तो ठीक सै सबनै,
पर सीधी मौत पै घर राजी होता कोन्या।
प...
दिन ढला, दीप जला
दिन का सफ़र सिमट कर अब ढल रहा है,
घर के अँधेरे कोने में इक दीप जल रहा है।
रिश्तों पे जम गई थी जो बर्फ़ पिछली शब,
देखो, चिराग़ की गर्मी से वो भी पिघल ...
अब आए हो?
तो... आ ही गए।
मेरी कामयाबी की गंध तुम्हें खींच ही लाई, जैसे लाश की महक गिद्धों को ले आती है।
क्या चाहिए?
हिस्सा? हमदर्दी? या बस मेरे जले हुए ज़ख़्...
मैं इसलिए किसी को नहीं चाहता...
यहाँ हर शख़्स काग़ज़ का खिलौना चाहता है,
मैं दिल देकर यूँ क़ीमत चुकाना नहीं चाहता।
लोग पढ़ते हैं चेहरे को मतलब निकालने तक,
मैं ऐसी कोई भी महफ़िल ...
पीछे है
हर कोई दौड़ रहा है, एक सराब के पीछे है
असली चेहरा कहाँ है, सब नक़ाब के पीछे है
रूह की सादगी को यहाँ कौन पूछता है
दुनिया तो बस जिस्म की आब-ओ-ताब के ...
ढूंढता हूँ
इस ज़िन्दगी के सफ़र में अपना निशान ढूंढता हूँ
मैं भीड़ में खो गया हूँ, एक इंसान ढूंढता हूँ
ज़मीन की तल्ख़ियों से दिल बहुत घबरा गया है
परिंदों की तर...
हाँ मैं अहंकारी हूँ।
जब लड़ रहा था मैं अकेले ज़िन्दगी के तूफ़ानों से,
जब घिरा हुआ था मैं मतलबपरस्त इंसानों से,
मैं अपने ही ग़मों का एक अकेला व्यापारी हूँ,
अगर इसे कहते ...
सौदा नहीं किया
इसमें एक ऐसे इंसान की ज़िद है जिसने अपनी भावनाओं और उसूलों को दुनिया के लालच में बिकने नहीं दिया
लाख आए ख़रीदार, मगर सौदा नहीं किया,
हमने दिल को द...
सौदा-ए-ज़िंदगी
इक उम्र गुज़ार दी हमने, इक नई उम्र पाने में,
अब कोसते हैं उसी वक़्त को, जो गंवाया ज़माने में।
कल के सुकून की ख़ातिर, हमने आज को गिरवी रख दिया,
पूरी...
दर्द का कारोबार
तेरे जाने के बाद, शायरी का कारोबार चलने लग गया,
हर महफ़िल में अब, मेरे नाम का जाम चलने लग गया।
तूने सोचा था कि टूट कर बिखर जाऊँगा मैं तन्हाई में,
म...
रहम-ओ-करम
जब एक इंसान दूसरों का दर्द बाँटते-बाँटते खुद खाली हो जाता है, तो उसे सिर्फ़ ऊपर वाले की 'रहमत' की आस होती है।
उसी 'दुआ' और 'पुकार के अंदाज़ में यह शायर...
यानी... तुम अब भी?
अब मेरा हाल पूछने आए हो? कमाल करते हो!
मैंने तो सब भुला दिया, तुम क्यों मलाल करते हो?
वो जो एक शख़्स था, वो कब का मर गया मुझ में,
तुम अब क़ब्र पर आ...
सुकून-ए-दीदार
हज़ारों उलझनें हैं ज़हन में, मगर सब भूल जाता हूँ,
मैं उसको देख लूँ पल भर, तो दिल को सुकून आए।
भटकता हूँ मैं दिन भर धूप में दुनिया की गलियों में,
...
जाम और यादें 🍷
हर रोज़ ज़हर के घूँट पीकर, मैं रोज़ मरता हूँ,
ख़बर न लग जाए किसी को, इसलिए आहिस्ता चलता हूँ।
किसी की याद ने पिछले चौराहे पे बोतल खुलवा दी,
अब उस रा...
ज़मीर का आईना
"माफ़ी कीजिये", कह कर वो बड़ी सादगी से मुस्कुराये,
जैसे खंजर छुपा रखा हो अपनी आस्तीन के ठिकाने में।
उजाड़ कर किसी का जहाँ, वो जश्न मनाते हैं,
कहते ...
गुज़रा ज़माना
आज बैठिये, शुक्रिया महफ़िल में आने में,
जाम पीजिये और चले जाइये गुज़रे ज़माने में।
वो जो कभी इंतेज़ार में रहती थी तुम्हारे,
अब किसी और का वक़्त पूछ...
एनिवर्सरी मुबारक
आज फिर से मुबारकबाद देने का दिन आया है,
वाह भाई! तुमने एक और साल कामयाबी से निभाया है!
कल तक जो बंदा दोस्तों की महफ़िल की शान था,
आज "सब्ज़ी ले आना...
पेग
सुकून तो मिलता है महफ़िलें जमाने में,
मगर अकेले पीता है वीडियो कॉल पे इस ज़माने में।
दिल तो जलता है उसकी गैर-हाज़िरी से,
आग लगे तेरी यादों को, हम त...
गाँव का तहख़ाना
उम्र गुज़र जाएगी मेरी इस शहर के ज़माने में,
फिर लौटकर जाऊँगा मैं, फिर उसी मेरे गाँव के तहख़ाने में।
यहाँ की रौनक़ें सब ख़्वाब हैं, सब खोखले से हैं,
...
कलाकार का गाँव
ख़याल में एक गाँव पहले बना दिया,
फिर अपने हाथ से उसको वहीं जला दिया।
वो जलता रहा और मैं हाथ सेंकता रहा,
उसी की आग को मैंने ही और हवा दिया।
बड़े ...
ठिकाना
ये क़ब्रिस्तान ही मेरा ठिकाना है मेरा,
यही सुनसान वीराना है मेरा।
वो खोपड़ी जो पड़ी है, वो दोस्त है मेरी,
ये सारा मुर्दा ज़माना है मेरा।
मैं र...
सन्नाटा
जहाँ पे रूह भटकती हैं, वो ठिकाना है मेरा,
ये क़ब्रिस्तान ही असली अफ़साना है मेरा।
तुम्हें है ख़ौफ़ अँधेरे का, और सन्नाटे का डर,
इन्हीं से तो पुरा...
क़ब्रिस्तान
तुम्हें आबादी मुबारक, मैं वीराने में रहता हूँ,
जहाँ मुर्दे सुलगते हैं, मैं उस शमशाने में रहता हूँ।
तुम्हें मख़मल के बिस्तर की ज़रूरत होगी,
मैं जह...
चिता
मुझे शमशानों की राख ने बनाया है,
मेरे अलफ़ाज़ को मुर्दों ने ही सिखाया है।
वो दूध जो तुम ज़िंदों को नसीब न होगा,
वो मुर्दों ने मुझे बचपन में पिलाय...
ससुराल का जाड़ा
वहाँ आलस था, यहाँ फ़र्ज़ निभाना पड़ता है,
ये सर्दी हो कि गर्मी, रोज़ नहाना पड़ता है।
रज़ाई छोड़ के मायके में कौन उठता था,
यहाँ सासू जी से पहले जा...
तुम क्या चाहती हो?
तुम अपने ज़हन में, कितनी बात छुपाती हो,
खामोश रह कर भी, न जाने क्या-क्या बताती हो।
मेरे अहसास को तोलकर, मेरे लिए नई दुनिया सजाती हो,
मगर लबों से हक...
मैं जिगर रखता हूँ
हवाओं से लड़ने का, मैं अजब हुनर रखता हूँ,
अंधेरों में भी खुद को जलाने का, जिगर रखता हूँ।
थक कर बैठ जाना, मेरी फ़ितरत में नहीं शामिल,
मैं काँटों पे भी...
मैं वो सूरज
खैरात में मिली हुई रौशनी, मुझे अंधी कर देती है,
मैं वो सूरज हूँ, जो किसी और के अम्बर से उगा नहीं।
तुझे गुमान है कि तेरी लहरें मुझे डुबो देंगी?
मैं ...
मेरा वजूद (My Existence) 🔥✊
आँधियाँ लाख आएँ, मैं अपनी जगह से हिला नहीं,
मैं वो पेड़ हूँ, जो तूफानों से कभी मिला नहीं।
मेरे सर को झुकाने की हसरत लिए बैठे हैं सब,
मगर मेरी गर्दन ...
वापसी
सुनो शहर...
अब अपने इन ऊँचे मकानों की खिड़कियाँ बंद कर लो,
क्योंकि वह 'शायर',
जो तुम्हारी सड़कों पर लफ़्ज़ ढूंढता फिरता था,
आज अपना कलम तोड़कर जा रहा ह...
🚬 सिगरेट और वफ़ा 🚬
तेरी यादें जब भी सीने में शोर मचाती हैं,
मैं ख़ामोशी से एक सिगरेट जला लेता हूँ।
तेरे होठों की तलब, अब कहाँ पूरी होती है?
अब तो इस जलती हुई 'लौ' को...
🇮🇳 लो हम चले, लो हम चले 🇮🇳
माँ से विदाई
माँ, अपने आँचल से ये आँसू पोंछ ले तू,
माथे पे मेरे, विजय का तिलक लगा दे तू।
दूध का क़र्ज़ तो शायद मैं चुका न पाऊँ,
बस सर पे हाथ रख कर, ...
बाक़ी बातें बाद में...
शाम का वक़्त हो, और हल्की सी ठंडी हवा हो जाए,
बस हम दोनों बैठे हों, और शोर थोड़ा कम हो जाए,
तुम बस मुस्कुराते हुए किचन से, वो भाप निकलता प्याला ले आओ,...
बच्चे की जान लोगी क्या? 😉😍
यूँ बन-संवर के छत पे आना, अब बस भी करो,
पूरे मोहल्ले का 'बीपी' (BP) बढ़ाना, अब बस भी करो।
तुम्हारी एक स्माइल से हो गया हूँ मैं 'शुगर' का मरीज़,
यूँ ...
माँ,
इस छोटे से कमरे में, कैसी ये वीरानी छाई है माँ,
आज फिर इस काली रात में, तेरी बहुत याद आई है माँ।
बुख़ार से तप रहा है बदन, और पानी पूछने वाला कोई नही...
इंसान नहीं, किरदार हो तुम
चेहरे पे चेहरा लगाते हो, बड़े अदाकार हो तुम,
सच कहूँ तो इंसान नहीं, बस एक किरदार हो तुम।
अपनी मर्ज़ी से कहाँ एक साँस भी लेते हो यहाँ?
ज़माने के हाथों ...
अपूर्ण हो तुम
कान्हा, भ्रम में मत रहना...
कि तुम 'पूर्ण' हो।
ज़रा अपने नाम के आगे से मेरा नाम हटाकर तो देखो,
तुम 'राधा-कृष्ण' से घटकर... महज़ एक 'किस्सा' रह जाओगे...
मेरी प्यारी माँ
आज फिर वही तारीख है...
वो दिन, जब मेरे सर से 'छत' और पैरों के नीचे से 'ज़मीन' एक साथ खिसक गई थी।
सब कहते हैं कि वक़्त के साथ सब ठी...
तुम, मैं और हमारा अनंत प्रेम
तुम मेरे कृष्णा, मैं तुम्हारी राधा,
तुमसे ही जुड़ी है मेरी हर एक बाधा।
संसार के लिए तुम पूजनीय भगवान हो,
पर मेरे लिए... तुम मेरा अभिमान हो।
सुनो....
भगोड़े भगवान
जब मेहनत की रोटी कमाना इनके बस की बात न थी,
ज़िंदगी की धूप में तपना इनकी औकात न थी।
छोड़कर रणभूमि को, ये कायर फ़रार हो गए,
कपड़े रंगे गेरुआ, और 'ध...
आसान नहीं होता
हर दर्द-ए-दिल ज़ुबाँ से बयाँ नहीं होता,
मोहब्बत का सफ़र इतना आसान नहीं होता।
हँसी के पीछे छुपा लेती है दुनिया ग़म को,
हर ज़ख्म का जिस्म पर निशान ...
"हवा की तरह"
मिला वो राह में अक्सर हवा की तरह,
गुज़र गया वो फिर इक बेवफ़ा की तरह।
तेरे बगैर ये कैसी है ज़िंदगी मेरी,
मिली है साँस भी मुझको सज़ा की तरह।
मैं ह...
शुरू होने से पहले
तुझे खोने का डर था पाने से पहले,
ख़त्म किस्सा हुआ शुरू होने से पहले।
बहुत रोए हैं हम मुस्कुराने से पहले,
ज़रा सोचो किसी का दिल दुखाने से पहले।
खबर...
गवारा नहीं
भीख में मिली इज़्ज़त हमें गवारा नहीं,
हम वो हैं जिन्हें किसी का सहारा नहीं।
जो एक बार मेरी नज़रों से गिर गया,
फिर उस शख्स को हम देखते दोबारा नहीं।
...
सब कुछ मिल गया, मगर...
सब कुछ मिल गया, बस एक मलाल रह गया,
जवाब तो ढूँढ लिए, पर ज़िंदा सवाल रह गया।
हम बनाते रहे ऊँचे मकान शहरों में उम्र भर,
मगर गाँव वाला वो कच्चा घर, ...
चेहरे पे नक़ाब
यहाँ हर शख्स अपने फ़ायदे का हिसाब रखता है,
हाथ मिलाता है मगर, चेहरे पे नक़ाब रखता है।
काँटों से बचकर चलने की हिदायत वही देता है,
जो अपनी मुट्ठी मे...
औकात दिखा दी
जो लोग मेरी इज़्ज़त के काबिल नहीं थे,
उन्हें हमने अपनी नज़रों से गिरा दिया।
बहुत शौक था उन्हें हमारे जज़्बातों से खेलने का,
हमने बाज़ी ही पलट दी ...
गुलामी नहीं करते
ये सर बस 'खुदा' के आगे झुकता है, हम किसी को सलाम नहीं करते,
हम बादशाह हैं अपनी मर्जी के, किसी की गुलामी नहीं करते।
मेरी इज़्ज़त ही मेरा गह...
तबाही का सुकून
बड़े सलीके से, बड़ी खामोशी के साथ,
अपनी ही खुशियों को करके आज़ाद,
कर रहा हूँ खुद को बर्बाद।
बना सकता था मैं भी महल, जोड़ सकता था मैं भी रिश्ते,
मगर...
सुलगते लोग और मेरी नींदें
ये लाल आँखें, ये बे-नींद रातें, सब मेरी 'मेहनत' की निशानी है,
दुनिया की 'पिछवाड़े' की आग से तो, ये कई गुना बेहतर कहानी है।
मेरी...
वैरागी की प्रेम-कथा
तुम्हें क्या लगता है,
आसान था एक 'योगी' से प्रेम करना?
वो, जो अपनी ही धुन में,
संसार से कटा हुआ,
बर्फ की चट्टानों पर बैठा था...
आँखें...
राख
राख में दबी चिंगारी कुरेदते क्यों हो?
जो भूल चुके हैं हमें, उन्हें ढूँढ़ते क्यों हो?
यह दिल तो कब का बन चुका है पत्थर दोस्तों,
अब इसके टूटने की आवा...