Mukesh Shekhawat

Mukesh Shekhawat

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Joined December 12, 2025

Published Poems (79)

Nazm

मौत की राजधानी

ये कैसा 'कोहरा' है जो अब छंटता नहीं,
सूरज भी अब इस शहर में निकलता नहीं।
हवाओं में यह कैसी ज़हर की मिलावट है,
साँस लेना भी अब तो, एक बगावत है।

सु...

22 1 December 17, 2025
Ghazal

दर्द का कोई बाज़ार नहीं

हुनर लफ़्ज़ों का बाज़ार में बिक सकता है बेशक,
मगर एहसास का दुनिया में कोई बाज़ार नहीं होता।
ये वो दौलत है जो रूह के जलने से मिलती है,
शायर कभी साँच...

13 1 December 17, 2025
Ghazal

शायरी की दुकान नहीं होती

​लफ़्ज़ों को जोड़ना तो बस एक हुनर है दुनिया का,
मगर याद रखना, एहसास की कोई दुकान नहीं होती।
​कलेजा चाहिए होता है लफ़्ज़ों में आग भरने को,
हर किसी के मुँ...

14 0 December 17, 2025
Ghazal

आखिर कौन हो तुम?

मेरे दिल में गूँजता हुआ, एक सवाल हो तुम,
हकीकत हो मेरी, या सिर्फ एक खयाल हो तुम।
कभी लगता है कि सदियों पुरानी पहचान है तुमसे,
कभी लगता है कि बिल्कु...

16 0 December 16, 2025
Ghazal

जीना सीख लिया

ठोकरें खाकर हमने सँभलना सीख लिया,
भीड़ में रहकर भी अकेले चलना सीख लिया।

कोई सुनता नहीं यहाँ चीखें किसी के दिल की,
हमने अब अपने दर्दों को सहना सीख...

15 0 December 15, 2025
Ghazal

भरोसा मर गया

वो शख्स जो कभी जान था, दिल से उतर गया,
जब काम निकल गया, वो वादे से मुकर गया।

काँच की तरह सँभाल के रखा था रिश्ता हमने,
एक ठेस लगी और सब कुछ बिखर ग...

16 0 December 15, 2025
Ghazal

छोड़ दिया

हमने अब लोगों को मनाना छोड़ दिया,
हर बात पर सफाई देना और बताना छोड़ दिया।

परख लिया है हमने इस मतलबी ज़माने को,
अब गैरों को अपना बनाना छोड़ दिया।
...

17 1 December 14, 2025
Ghazal

किरदार निभाना पड़ता है

दर्द दिल में हो मगर होंठों से मुस्कुराना पड़ता है,
इस दुनिया के डर से अपना ग़म छुपाना पड़ता है।

यहाँ कोई नहीं समझता खामोशियाँ किसी की,
हाल-ए-दिल ल...

13 1 December 14, 2025
Ghazal

मिट्टी का वजूद

उम्र गुज़ार दी हमने मकान सजाने में,
वक़्त ही न मिला खुद को बसाने में।

पेट की भूख ने ये कैसा हुनर सिखा दिया,
खिलौना बन गया इंसान रोटी कमाने में।
...

16 1 December 14, 2025
Shayari

काँच का तोहफा न देना कभी

काँच का तोहफा न देना कभी, रूठ कर लोग 'तोड़' दिया करते हैं,
जो बहुत अच्छे हों, उन्हें अक्सर लोग 'छोड़' दिया करते हैं।

17 0 December 13, 2025
Shayari

तब तक ज़िन्दगी चाहिए।

मुझे तेरा साथ ज़िन्दगी भर नहीं चाहिए,
बल्कि जब तक तू साथ है, तब तक ज़िन्दगी चाहिए।

14 1 December 13, 2025
Shayari

हजारों महफिलें

हजारों महफिलें हैं और लाखों मेले हैं,
पर जहाँ तुम नहीं, वहाँ हम अकेले हैं।

14 1 December 13, 2025
Shayari

ज़रूरी नहीं

ज़रूरी नहीं कि इश्क़ में बाहों का सहारा मिले,
किसी को जी भर के महसूस करना भी मोहब्बत है।

18 1 December 12, 2025
Shayari

फुर्सत

फुर्सत मिले तो कभी हम से भी मिल लेना,
बड़ी फुर्सत से तुम्हारी याद में उदास बैठे हैं।

14 1 December 12, 2025
Shayari

दुश्मनी

एक नाम क्या लिखा तेरा साहिल की रेत पर,
फिर उम्र भर हवा से मेरी दुश्मनी रही।

13 1 December 12, 2025
Shayari

अलफ़ाज़

अलफ़ाज़ के कुछ ज़ायके ज़ुबाँ पे रहने दो,
कुछ बातें ऐसी भी हैं जो खामोश अच्छी हैं।

12 1 December 12, 2025
Ghazal

गुमशुदा हो गया

मैं खुद को ढूँढने निकला था, गुमशुदा हो गया,
ये कैसा सफ़र था, जो खुद से ही जुदा हो गया।
बहुत सँभल के चला था मैं ज़िंदगी की राह में,
ज़रा सी आँख क्या...

11 1 December 12, 2025
Ghazal

ज़माने बदल गए

बड़ी खामोशी से वो रिश्ते बदल गए,
हम वही रहे, मगर ज़माने बदल गए।
जिन्हें कहते थे हम अपनी ज़िंदगी कभी,
देखते ही देखते उनके ठिकाने बदल गए।
वक़्त की आ...

11 1 December 12, 2025
Ghazal

संभाल रखा है

तेरी यादों को दिल में बसा रखा है,
हमने खुद को दुनिया से छुपा रखा है।
हवाओं से कह दो कि ज़ोर न लगाएँ,
एक चिराग-ए-उम्मीद जला रखा है।
वो आएंगे शायद इ...

9 0 December 12, 2025
Rubai

रुबाई

वो ख्वाब था बिखर गया, ख्याल रह गया,
दिल में बस एक दबे पाँव सवाल रह गया।
हमने तो चाहा था उन्हें ज़िंदगी से बढ़कर,
अब उनके जाने का बस एक मलाल रह गया।

15 0 December 12, 2025
Ghazal

एहसास

यहाँ हर आदमी अंदर से कुछ टूटा है,
किसी के दर्द को बस प्यार से बुलाकर तो देखो।

जो गिर गया है, उसे तुम हँसी में टालो मत,
ज़रा सा हाथ बढ़ा कर, उसे उ...

18 0 December 12, 2025
Shayari

सिगरेट के धुएँ का अक्स

वो जा चुकी है, मैं सब कुछ फ़ना कर रहा हूँ,
मैं जल रहा हूँ और सबको धुआँ' कर रहा हूँ।

ये राख 'बिखरी' नहीं है, ये 'क़िस्सा' है मेरा,
मैं अपनी 'उम्र'...

18 0 December 12, 2025
Ghazal

इंसानियत का आसरा

किसी के ज़ख़्म की कोई दवा होना चाहिए,
बुरे वक़्तों में कोई आसरा होना चाहिए।

ये जो इंसान हैं, टूटे हुए हैं अंदर से,
इन्हें छूने को लहजा नरम होना च...

14 0 December 12, 2025
Ghazal

बाज़ार

यहाँ 'ज़मीर' भी 'बाज़ार' में सरे-आम बिकता है,
वो 'सच' क्या बोलेगा, जिसका 'ईमान' बिकता है।

तू 'मंदिर-मस्जिद' में 'रब' को ढूँढता है 'नादान',
वहाँ त...

12 0 December 12, 2025
Ghazal

मरघट का सच

जो 'माल' गिनता था, उसका 'ख़याल' जल गया।
जो 'मैं' का 'जाल' बुना था, वो 'जंजाल' जल गया।
मरघट का सच
वो 'ऊँची ज़ात' की बातें, वो 'ऊँचा' सर उसका,
चिता ...

9 0 December 12, 2025
Ghazal

मरघट का पाखंड

जो घर पे फ़र्ज़ न अपना निभाने निकले,
वो झूठे आँसू नदी में बहाने निकले
ज़मीन बाँट चुके जो अभी से आपस में,
वही चिता पे हैं 'रिश्ते' जताने निकले।

...

12 0 December 12, 2025
Ghazal

आदत

चेहरे पे चेहरा हर घड़ी चढ़ाने की आदत है।
दुनिया को झूठे ख़्वाब ही दिखाने की आदत है।

जब काम हो तो पास वो आ जाने की आदत है।
मक़सद हुआ पूरा, तो कतरा...

22 0 December 12, 2025
Ghazal

मरण

रोज साँसां की किस्तां नै भरता रहूँ,
इस जिन्दगी का कर्जा उतरता कोन्या।

घुट-घुट कै मर जाऊँ तो ठीक सै सबनै,
पर सीधी मौत पै घर राजी होता कोन्या।

प...

13 0 December 12, 2025
Shayari

दिन ढला, दीप जला

दिन का सफ़र सिमट कर अब ढल रहा है,
घर के अँधेरे कोने में इक दीप जल रहा है।
रिश्तों पे जम गई थी जो बर्फ़ पिछली शब,
देखो, चिराग़ की गर्मी से वो भी पिघल ...

10 0 December 12, 2025
Nazm

अब आए हो?

तो... आ ही गए।
मेरी कामयाबी की गंध तुम्हें खींच ही लाई, जैसे लाश की महक गिद्धों को ले आती है।
क्या चाहिए?
हिस्सा? हमदर्दी? या बस मेरे जले हुए ज़ख़्...

11 0 December 12, 2025
Ghazal

मैं इसलिए किसी को नहीं चाहता...

यहाँ हर शख़्स काग़ज़ का खिलौना चाहता है,
मैं दिल देकर यूँ क़ीमत चुकाना नहीं चाहता।

लोग पढ़ते हैं चेहरे को मतलब निकालने तक,
मैं ऐसी कोई भी महफ़िल ...

10 0 December 12, 2025
Shayari

पीछे है

हर कोई दौड़ रहा है, एक सराब के पीछे है
असली चेहरा कहाँ है, सब नक़ाब के पीछे है
रूह की सादगी को यहाँ कौन पूछता है
दुनिया तो बस जिस्म की आब-ओ-ताब के ...

13 0 December 12, 2025
Shayari

ढूंढता हूँ

इस ज़िन्दगी के सफ़र में अपना निशान ढूंढता हूँ
मैं भीड़ में खो गया हूँ, एक इंसान ढूंढता हूँ
ज़मीन की तल्ख़ियों से दिल बहुत घबरा गया है
परिंदों की तर...

13 0 December 12, 2025
Ghazal

हाँ मैं अहंकारी हूँ।

जब लड़ रहा था मैं अकेले ज़िन्दगी के तूफ़ानों से,
जब घिरा हुआ था मैं मतलबपरस्त इंसानों से,
मैं अपने ही ग़मों का एक अकेला व्यापारी हूँ,
अगर इसे कहते ...

12 0 December 12, 2025
Ghazal

सौदा नहीं किया

इसमें एक ऐसे इंसान की ज़िद है जिसने अपनी भावनाओं और उसूलों को दुनिया के लालच में बिकने नहीं दिया

लाख आए ख़रीदार, मगर सौदा नहीं किया,
हमने दिल को द...

15 0 December 12, 2025
Ghazal

सौदा-ए-ज़िंदगी

इक उम्र गुज़ार दी हमने, इक नई उम्र पाने में,
अब कोसते हैं उसी वक़्त को, जो गंवाया ज़माने में।
कल के सुकून की ख़ातिर, हमने आज को गिरवी रख दिया,
पूरी...

19 0 December 12, 2025
Ghazal

दर्द का कारोबार

तेरे जाने के बाद, शायरी का कारोबार चलने लग गया,
हर महफ़िल में अब, मेरे नाम का जाम चलने लग गया।
तूने सोचा था कि टूट कर बिखर जाऊँगा मैं तन्हाई में,
म...

13 0 December 12, 2025
Ghazal

रहम-ओ-करम

जब एक इंसान दूसरों का दर्द बाँटते-बाँटते खुद खाली हो जाता है, तो उसे सिर्फ़ ऊपर वाले की 'रहमत' की आस होती है।
उसी 'दुआ' और 'पुकार के अंदाज़ में यह शायर...

15 0 December 12, 2025
Ghazal

यानी... तुम अब भी?

अब मेरा हाल पूछने आए हो? कमाल करते हो!
मैंने तो सब भुला दिया, तुम क्यों मलाल करते हो?
वो जो एक शख़्स था, वो कब का मर गया मुझ में,
तुम अब क़ब्र पर आ...

12 0 December 12, 2025
Ghazal

सुकून-ए-दीदार

हज़ारों उलझनें हैं ज़हन में, मगर सब भूल जाता हूँ,
मैं उसको देख लूँ पल भर, तो दिल को सुकून आए।

भटकता हूँ मैं दिन भर धूप में दुनिया की गलियों में,
...

10 0 December 12, 2025
Ghazal

जाम और यादें 🍷

हर रोज़ ज़हर के घूँट पीकर, मैं रोज़ मरता हूँ,
ख़बर न लग जाए किसी को, इसलिए आहिस्ता चलता हूँ।
किसी की याद ने पिछले चौराहे पे बोतल खुलवा दी,
अब उस रा...

12 0 December 12, 2025
Ghazal

ज़मीर का आईना

"माफ़ी कीजिये", कह कर वो बड़ी सादगी से मुस्कुराये,
जैसे खंजर छुपा रखा हो अपनी आस्तीन के ठिकाने में।
उजाड़ कर किसी का जहाँ, वो जश्न मनाते हैं,
कहते ...

14 0 December 12, 2025
Ghazal

गुज़रा ज़माना

आज बैठिये, शुक्रिया महफ़िल में आने में,
जाम पीजिये और चले जाइये गुज़रे ज़माने में।
वो जो कभी इंतेज़ार में रहती थी तुम्हारे,
अब किसी और का वक़्त पूछ...

14 0 December 12, 2025
Ghazal

एनिवर्सरी मुबारक

आज फिर से मुबारकबाद देने का दिन आया है,
वाह भाई! तुमने एक और साल कामयाबी से निभाया है!
कल तक जो बंदा दोस्तों की महफ़िल की शान था,
आज "सब्ज़ी ले आना...

13 0 December 12, 2025
Ghazal

पेग

सुकून तो मिलता है महफ़िलें जमाने में,
मगर अकेले पीता है वीडियो कॉल पे इस ज़माने में।
दिल तो जलता है उसकी गैर-हाज़िरी से,
आग लगे तेरी यादों को, हम त...

14 0 December 12, 2025
Ghazal

गाँव का तहख़ाना

उम्र गुज़र जाएगी मेरी इस शहर के ज़माने में,
फिर लौटकर जाऊँगा मैं, फिर उसी मेरे गाँव के तहख़ाने में।
यहाँ की रौनक़ें सब ख़्वाब हैं, सब खोखले से हैं,
...

11 0 December 12, 2025
Ghazal

कलाकार का गाँव

ख़याल में एक गाँव पहले बना दिया,
फिर अपने हाथ से उसको वहीं जला दिया।
वो जलता रहा और मैं हाथ सेंकता रहा,
उसी की आग को मैंने ही और हवा दिया।

बड़े ...

11 0 December 12, 2025
Ghazal

ठिकाना

ये क़ब्रिस्तान ही मेरा ठिकाना है मेरा,
यही सुनसान वीराना है मेरा।

वो खोपड़ी जो पड़ी है, वो दोस्त है मेरी,
ये सारा मुर्दा ज़माना है मेरा।

मैं र...

14 0 December 12, 2025
Ghazal

सन्नाटा

जहाँ पे रूह भटकती हैं, वो ठिकाना है मेरा,
ये क़ब्रिस्तान ही असली अफ़साना है मेरा।

तुम्हें है ख़ौफ़ अँधेरे का, और सन्नाटे का डर,
इन्हीं से तो पुरा...

15 0 December 12, 2025
Ghazal

क़ब्रिस्तान

तुम्हें आबादी मुबारक, मैं वीराने में रहता हूँ,
जहाँ मुर्दे सुलगते हैं, मैं उस शमशाने में रहता हूँ।

तुम्हें मख़मल के बिस्तर की ज़रूरत होगी,
मैं जह...

11 0 December 12, 2025
Ghazal

चिता

मुझे शमशानों की राख ने बनाया है,
मेरे अलफ़ाज़ को मुर्दों ने ही सिखाया है।

वो दूध जो तुम ज़िंदों को नसीब न होगा,
वो मुर्दों ने मुझे बचपन में पिलाय...

16 0 December 12, 2025
Ghazal

ससुराल का जाड़ा

वहाँ आलस था, यहाँ फ़र्ज़ निभाना पड़ता है,
ये सर्दी हो कि गर्मी, रोज़ नहाना पड़ता है।

रज़ाई छोड़ के मायके में कौन उठता था,
यहाँ सासू जी से पहले जा...

11 0 December 12, 2025
Ghazal

तुम क्या चाहती हो?

तुम अपने ज़हन में, कितनी बात छुपाती हो,
खामोश रह कर भी, न जाने क्या-क्या बताती हो।
मेरे अहसास को तोलकर, मेरे लिए नई दुनिया सजाती हो,
मगर लबों से हक...

14 0 December 12, 2025
Ghazal

मैं जिगर रखता हूँ

हवाओं से लड़ने का, मैं अजब हुनर रखता हूँ,
अंधेरों में भी खुद को जलाने का, जिगर रखता हूँ।
थक कर बैठ जाना, मेरी फ़ितरत में नहीं शामिल,
मैं काँटों पे भी...

11 0 December 12, 2025
Ghazal

मैं वो सूरज

खैरात में मिली हुई रौशनी, मुझे अंधी कर देती है,
मैं वो सूरज हूँ, जो किसी और के अम्बर से उगा नहीं।
तुझे गुमान है कि तेरी लहरें मुझे डुबो देंगी?
मैं ...

10 0 December 12, 2025
Ghazal

मेरा वजूद (My Existence) 🔥✊

आँधियाँ लाख आएँ, मैं अपनी जगह से हिला नहीं,
मैं वो पेड़ हूँ, जो तूफानों से कभी मिला नहीं।
मेरे सर को झुकाने की हसरत लिए बैठे हैं सब,
मगर मेरी गर्दन ...

10 0 December 12, 2025
Nazm

वापसी

सुनो शहर...
अब अपने इन ऊँचे मकानों की खिड़कियाँ बंद कर लो,
क्योंकि वह 'शायर',
जो तुम्हारी सड़कों पर लफ़्ज़ ढूंढता फिरता था,
आज अपना कलम तोड़कर जा रहा ह...

11 0 December 12, 2025
Ghazal

🚬 सिगरेट और वफ़ा 🚬

तेरी यादें जब भी सीने में शोर मचाती हैं,
मैं ख़ामोशी से एक सिगरेट जला लेता हूँ।

तेरे होठों की तलब, अब कहाँ पूरी होती है?
अब तो इस जलती हुई 'लौ' को...

9 0 December 12, 2025
Ghazal

🇮🇳 लो हम चले, लो हम चले 🇮🇳

माँ से विदाई
माँ, अपने आँचल से ये आँसू पोंछ ले तू,
माथे पे मेरे, विजय का तिलक लगा दे तू।
दूध का क़र्ज़ तो शायद मैं चुका न पाऊँ,
बस सर पे हाथ रख कर, ...

9 0 December 12, 2025
Rubai

बाक़ी बातें बाद में...

शाम का वक़्त हो, और हल्की सी ठंडी हवा हो जाए,
बस हम दोनों बैठे हों, और शोर थोड़ा कम हो जाए,
तुम बस मुस्कुराते हुए किचन से, वो भाप निकलता प्याला ले आओ,...

10 0 December 12, 2025
Ghazal

बच्चे की जान लोगी क्या? 😉😍

यूँ बन-संवर के छत पे आना, अब बस भी करो,
पूरे मोहल्ले का 'बीपी' (BP) बढ़ाना, अब बस भी करो।
तुम्हारी एक स्माइल से हो गया हूँ मैं 'शुगर' का मरीज़,
यूँ ...

15 0 December 12, 2025
Nazm

माँ,

इस छोटे से कमरे में, कैसी ये वीरानी छाई है माँ,
आज फिर इस काली रात में, तेरी बहुत याद आई है माँ।
बुख़ार से तप रहा है बदन, और पानी पूछने वाला कोई नही...

18 0 December 12, 2025
Nazm

इंसान नहीं, किरदार हो तुम

चेहरे पे चेहरा लगाते हो, बड़े अदाकार हो तुम,
सच कहूँ तो इंसान नहीं, बस एक किरदार हो तुम।
अपनी मर्ज़ी से कहाँ एक साँस भी लेते हो यहाँ?
ज़माने के हाथों ...

12 0 December 12, 2025
Nazm

अपूर्ण हो तुम

कान्हा, भ्रम में मत रहना...
कि तुम 'पूर्ण' हो।
ज़रा अपने नाम के आगे से मेरा नाम हटाकर तो देखो,
तुम 'राधा-कृष्ण' से घटकर... महज़ एक 'किस्सा' रह जाओगे...

12 0 December 12, 2025
Nazm

मेरी प्यारी माँ

आज फिर वही तारीख है...
वो दिन, जब मेरे सर से 'छत' और पैरों के नीचे से 'ज़मीन' एक साथ खिसक गई थी।
सब कहते हैं कि वक़्त के साथ सब ठी...

175 1 January 1, 1970
Nazm

तुम, मैं और हमारा अनंत प्रेम

तुम मेरे कृष्णा, मैं तुम्हारी राधा,
तुमसे ही जुड़ी है मेरी हर एक बाधा।
संसार के लिए तुम पूजनीय भगवान हो,
पर मेरे लिए... तुम मेरा अभिमान हो।

सुनो....

12 0 January 1, 1970
Nazm

भगोड़े भगवान

जब मेहनत की रोटी कमाना इनके बस की बात न थी,
ज़िंदगी की धूप में तपना इनकी औकात न थी।
छोड़कर रणभूमि को, ये कायर फ़रार हो गए,
कपड़े रंगे गेरुआ, और 'ध...

10 1 January 1, 1970
Ghazal

आसान नहीं होता

​हर दर्द-ए-दिल ज़ुबाँ से बयाँ नहीं होता,
मोहब्बत का सफ़र इतना आसान नहीं होता।
​हँसी के पीछे छुपा लेती है दुनिया ग़म को,
हर ज़ख्म का जिस्म पर निशान ...

9 0 January 1, 1970
Ghazal

"हवा की तरह"

मिला वो राह में अक्सर हवा की तरह,
गुज़र गया वो फिर इक बेवफ़ा की तरह।
​तेरे बगैर ये कैसी है ज़िंदगी मेरी,
मिली है साँस भी मुझको सज़ा की तरह।
​मैं ह...

14 1 January 1, 1970
Ghazal

शुरू होने से पहले

तुझे खोने का डर था पाने से पहले,
ख़त्म किस्सा हुआ शुरू होने से पहले।
बहुत रोए हैं हम मुस्कुराने से पहले,
ज़रा सोचो किसी का दिल दुखाने से पहले।
खबर...

26 1 January 1, 1970
Ghazal

गवारा नहीं

भीख में मिली इज़्ज़त हमें गवारा नहीं,
हम वो हैं जिन्हें किसी का सहारा नहीं।
जो एक बार मेरी नज़रों से गिर गया,
फिर उस शख्स को हम देखते दोबारा नहीं।
...

14 1 January 1, 1970
Ghazal

सब कुछ मिल गया, मगर...

सब कुछ मिल गया, बस एक मलाल रह गया,
जवाब तो ढूँढ लिए, पर ज़िंदा सवाल रह गया।

हम बनाते रहे ऊँचे मकान शहरों में उम्र भर,
मगर गाँव वाला वो कच्चा घर, ...

16 1 January 1, 1970
Ghazal

चेहरे पे नक़ाब

यहाँ हर शख्स अपने फ़ायदे का हिसाब रखता है,
हाथ मिलाता है मगर, चेहरे पे नक़ाब रखता है।
काँटों से बचकर चलने की हिदायत वही देता है,

जो अपनी मुट्ठी मे...

17 0 January 1, 1970
Ghazal

औकात दिखा दी

जो लोग मेरी इज़्ज़त के काबिल नहीं थे,
उन्हें हमने अपनी नज़रों से गिरा दिया।

बहुत शौक था उन्हें हमारे जज़्बातों से खेलने का,
हमने बाज़ी ही पलट दी ...

16 0 January 1, 1970
Ghazal

गुलामी नहीं करते

ये सर बस 'खुदा' के आगे झुकता है, हम किसी को सलाम नहीं करते,
हम बादशाह हैं अपनी मर्जी के, किसी की गुलामी नहीं करते।
मेरी इज़्ज़त ही मेरा गह...

12 0 January 1, 1970
Ghazal

तबाही का सुकून

बड़े सलीके से, बड़ी खामोशी के साथ,
अपनी ही खुशियों को करके आज़ाद,
कर रहा हूँ खुद को बर्बाद।

बना सकता था मैं भी महल, जोड़ सकता था मैं भी रिश्ते,
मगर...

12 0 January 1, 1970
Ghazal

सुलगते लोग और मेरी नींदें

ये लाल आँखें, ये बे-नींद रातें, सब मेरी 'मेहनत' की निशानी है,
दुनिया की 'पिछवाड़े' की आग से तो, ये कई गुना बेहतर कहानी है।

मेरी...

5 0 January 1, 1970
Ghazal

वैरागी की प्रेम-कथा

​तुम्हें क्या लगता है,
आसान था एक 'योगी' से प्रेम करना?
​वो, जो अपनी ही धुन में,
संसार से कटा हुआ,
बर्फ की चट्टानों पर बैठा था...
आँखें...

5 0 January 1, 1970
Rubai

राख

राख में दबी चिंगारी कुरेदते क्यों हो?
जो भूल चुके हैं हमें, उन्हें ढूँढ़ते क्यों हो?
यह दिल तो कब का बन चुका है पत्थर दोस्तों,
अब इसके टूटने की आवा...

16 0 January 1, 1970