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नज़रिये की बात

कभी ब्राह्मण प्यासा भी हो सकता है
शूद्रों का अपना कुआँ भी हो सकता है
​धुँध समझकर मास्क मत हटाना
देश की हवा में धुआँ भी हो सकता है
​जिस गंगा में तुम अपने पाप धो रहे हो
उसका पानी अछूत का छुआ भी हो ...
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हम यह आ गए

सोच के जिस बारे में
आंखें आती थी झलक
आज उसी से लड़ रहे है हम
जिस तरह कभी भी सोचा न था
वो कुछ इस कदर कर रहे है हम
जब सब कुछ होकर भी सही
गलत से लड़ रहे है हम
पता होकर सबकुछ
न जाने किसी अनजान बन...