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Kavita
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नज़रिये की बात
कभी ब्राह्मण प्यासा भी हो सकता है
शूद्रों का अपना कुआँ भी हो सकता है
धुँध समझकर मास्क मत हटाना
देश की हवा में धुआँ भी हो सकता है
जिस गंगा में तुम अपने पाप धो रहे हो
उसका पानी अछूत का छुआ भी हो ...
शूद्रों का अपना कुआँ भी हो सकता है
धुँध समझकर मास्क मत हटाना
देश की हवा में धुआँ भी हो सकता है
जिस गंगा में तुम अपने पाप धो रहे हो
उसका पानी अछूत का छुआ भी हो ...
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हम यह आ गए
सोच के जिस बारे में
आंखें आती थी झलक
आज उसी से लड़ रहे है हम
जिस तरह कभी भी सोचा न था
वो कुछ इस कदर कर रहे है हम
जब सब कुछ होकर भी सही
गलत से लड़ रहे है हम
पता होकर सबकुछ
न जाने किसी अनजान बन...
आंखें आती थी झलक
आज उसी से लड़ रहे है हम
जिस तरह कभी भी सोचा न था
वो कुछ इस कदर कर रहे है हम
जब सब कुछ होकर भी सही
गलत से लड़ रहे है हम
पता होकर सबकुछ
न जाने किसी अनजान बन...