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Explore our collection of 56 beautiful poems
Ghazal
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दर्द का कोई बाज़ार नहीं
हुनर लफ़्ज़ों का बाज़ार में बिक सकता है बेशक,
मगर एहसास का दुनिया में कोई बाज़ार नहीं होता।
ये वो दौलत है जो रूह के जलने से मिलती है,
शायर कभी साँचे में ढल कर तैयार नहीं होता।
कलम घिसने से अगर कोई...
मगर एहसास का दुनिया में कोई बाज़ार नहीं होता।
ये वो दौलत है जो रूह के जलने से मिलती है,
शायर कभी साँचे में ढल कर तैयार नहीं होता।
कलम घिसने से अगर कोई...
Ghazal
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शायरी की दुकान नहीं होती
लफ़्ज़ों को जोड़ना तो बस एक हुनर है दुनिया का,
मगर याद रखना, एहसास की कोई दुकान नहीं होती।
कलेजा चाहिए होता है लफ़्ज़ों में आग भरने को,
हर किसी के मुँह में ऐसी तासीर-ए-ज़ुबान नहीं होती।
ये वो दौलत है...
मगर याद रखना, एहसास की कोई दुकान नहीं होती।
कलेजा चाहिए होता है लफ़्ज़ों में आग भरने को,
हर किसी के मुँह में ऐसी तासीर-ए-ज़ुबान नहीं होती।
ये वो दौलत है...
Ghazal
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आखिर कौन हो तुम?
मेरे दिल में गूँजता हुआ, एक सवाल हो तुम,
हकीकत हो मेरी, या सिर्फ एक खयाल हो तुम।
कभी लगता है कि सदियों पुरानी पहचान है तुमसे,
कभी लगता है कि बिल्कुल ही, अनजान हो तुम।
मेरे सूने से दिल में मचा, एक ...
हकीकत हो मेरी, या सिर्फ एक खयाल हो तुम।
कभी लगता है कि सदियों पुरानी पहचान है तुमसे,
कभी लगता है कि बिल्कुल ही, अनजान हो तुम।
मेरे सूने से दिल में मचा, एक ...
Ghazal
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जीना सीख लिया
ठोकरें खाकर हमने सँभलना सीख लिया,
भीड़ में रहकर भी अकेले चलना सीख लिया।
कोई सुनता नहीं यहाँ चीखें किसी के दिल की,
हमने अब अपने दर्दों को सहना सीख लिया।
बहुत देखे हैं गिरगिट की तरह रंग बदलते लो...
भीड़ में रहकर भी अकेले चलना सीख लिया।
कोई सुनता नहीं यहाँ चीखें किसी के दिल की,
हमने अब अपने दर्दों को सहना सीख लिया।
बहुत देखे हैं गिरगिट की तरह रंग बदलते लो...
Ghazal
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भरोसा मर गया
वो शख्स जो कभी जान था, दिल से उतर गया,
जब काम निकल गया, वो वादे से मुकर गया।
काँच की तरह सँभाल के रखा था रिश्ता हमने,
एक ठेस लगी और सब कुछ बिखर गया।
भीड़ में तो दिखता हूँ मैं हँसता हुआ मगर,
क...
जब काम निकल गया, वो वादे से मुकर गया।
काँच की तरह सँभाल के रखा था रिश्ता हमने,
एक ठेस लगी और सब कुछ बिखर गया।
भीड़ में तो दिखता हूँ मैं हँसता हुआ मगर,
क...
Ghazal
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छोड़ दिया
हमने अब लोगों को मनाना छोड़ दिया,
हर बात पर सफाई देना और बताना छोड़ दिया।
परख लिया है हमने इस मतलबी ज़माने को,
अब गैरों को अपना बनाना छोड़ दिया।
लोग तमाशा बनाते हैं अक्सर जज़्बातों का,
इसलिये...
हर बात पर सफाई देना और बताना छोड़ दिया।
परख लिया है हमने इस मतलबी ज़माने को,
अब गैरों को अपना बनाना छोड़ दिया।
लोग तमाशा बनाते हैं अक्सर जज़्बातों का,
इसलिये...
Ghazal
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किरदार निभाना पड़ता है
दर्द दिल में हो मगर होंठों से मुस्कुराना पड़ता है,
इस दुनिया के डर से अपना ग़म छुपाना पड़ता है।
यहाँ कोई नहीं समझता खामोशियाँ किसी की,
हाल-ए-दिल लफ़्ज़ों में सबको बताना पड़ता है।
ये ज़िन्दगी एक ...
इस दुनिया के डर से अपना ग़म छुपाना पड़ता है।
यहाँ कोई नहीं समझता खामोशियाँ किसी की,
हाल-ए-दिल लफ़्ज़ों में सबको बताना पड़ता है।
ये ज़िन्दगी एक ...
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मिट्टी का वजूद
उम्र गुज़ार दी हमने मकान सजाने में,
वक़्त ही न मिला खुद को बसाने में।
पेट की भूख ने ये कैसा हुनर सिखा दिया,
खिलौना बन गया इंसान रोटी कमाने में।
वो शख्स जो कहता था मेरा कद है आसमान जैसा,
ढेर म...
वक़्त ही न मिला खुद को बसाने में।
पेट की भूख ने ये कैसा हुनर सिखा दिया,
खिलौना बन गया इंसान रोटी कमाने में।
वो शख्स जो कहता था मेरा कद है आसमान जैसा,
ढेर म...
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गुमशुदा हो गया
मैं खुद को ढूँढने निकला था, गुमशुदा हो गया,
ये कैसा सफ़र था, जो खुद से ही जुदा हो गया।
बहुत सँभल के चला था मैं ज़िंदगी की राह में,
ज़रा सी आँख क्या झपकी, हादसा हो गया।
वही वो शख्स था, जिस पर मुझे ...
ये कैसा सफ़र था, जो खुद से ही जुदा हो गया।
बहुत सँभल के चला था मैं ज़िंदगी की राह में,
ज़रा सी आँख क्या झपकी, हादसा हो गया।
वही वो शख्स था, जिस पर मुझे ...
Ghazal
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ज़माने बदल गए
बड़ी खामोशी से वो रिश्ते बदल गए,
हम वही रहे, मगर ज़माने बदल गए।
जिन्हें कहते थे हम अपनी ज़िंदगी कभी,
देखते ही देखते उनके ठिकाने बदल गए।
वक़्त की आँधी ने कैसा रुख मोड़ लिया,
पेड़ वही हैं, मगर आशिय...
हम वही रहे, मगर ज़माने बदल गए।
जिन्हें कहते थे हम अपनी ज़िंदगी कभी,
देखते ही देखते उनके ठिकाने बदल गए।
वक़्त की आँधी ने कैसा रुख मोड़ लिया,
पेड़ वही हैं, मगर आशिय...
Ghazal
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संभाल रखा है
तेरी यादों को दिल में बसा रखा है,
हमने खुद को दुनिया से छुपा रखा है।
हवाओं से कह दो कि ज़ोर न लगाएँ,
एक चिराग-ए-उम्मीद जला रखा है।
वो आएंगे शायद इसी रास्ते से कहीं,
नज़रों को दहलीज़ पे बिछा रखा ह...
हमने खुद को दुनिया से छुपा रखा है।
हवाओं से कह दो कि ज़ोर न लगाएँ,
एक चिराग-ए-उम्मीद जला रखा है।
वो आएंगे शायद इसी रास्ते से कहीं,
नज़रों को दहलीज़ पे बिछा रखा ह...
Ghazal
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एहसास
यहाँ हर आदमी अंदर से कुछ टूटा है,
किसी के दर्द को बस प्यार से बुलाकर तो देखो।
जो गिर गया है, उसे तुम हँसी में टालो मत,
ज़रा सा हाथ बढ़ा कर, उसे उठा कर तो देखो।
ये नफ़रतें, ये जलन, सब धुआँ हो ज...
किसी के दर्द को बस प्यार से बुलाकर तो देखो।
जो गिर गया है, उसे तुम हँसी में टालो मत,
ज़रा सा हाथ बढ़ा कर, उसे उठा कर तो देखो।
ये नफ़रतें, ये जलन, सब धुआँ हो ज...