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Explore our collection of 12 beautiful poems
Shayari
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वादे
जो किए ही नहीं कभी मैंने
वो भी वादे निभा रहा हूँ मैं
मुझसे फिर बात कर रही है वो
फिर से बातों में आ रहा हूँ मैं
वो भी वादे निभा रहा हूँ मैं
मुझसे फिर बात कर रही है वो
फिर से बातों में आ रहा हूँ मैं
Shayari
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काँच का तोहफा न देना कभी
काँच का तोहफा न देना कभी, रूठ कर लोग 'तोड़' दिया करते हैं,
जो बहुत अच्छे हों, उन्हें अक्सर लोग 'छोड़' दिया करते हैं।
जो बहुत अच्छे हों, उन्हें अक्सर लोग 'छोड़' दिया करते हैं।
Shayari
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तब तक ज़िन्दगी चाहिए।
मुझे तेरा साथ ज़िन्दगी भर नहीं चाहिए,
बल्कि जब तक तू साथ है, तब तक ज़िन्दगी चाहिए।
बल्कि जब तक तू साथ है, तब तक ज़िन्दगी चाहिए।
Shayari
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हजारों महफिलें
हजारों महफिलें हैं और लाखों मेले हैं,
पर जहाँ तुम नहीं, वहाँ हम अकेले हैं।
पर जहाँ तुम नहीं, वहाँ हम अकेले हैं।
Shayari
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ज़रूरी नहीं
ज़रूरी नहीं कि इश्क़ में बाहों का सहारा मिले,
किसी को जी भर के महसूस करना भी मोहब्बत है।
किसी को जी भर के महसूस करना भी मोहब्बत है।
Shayari
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फुर्सत
फुर्सत मिले तो कभी हम से भी मिल लेना,
बड़ी फुर्सत से तुम्हारी याद में उदास बैठे हैं।
बड़ी फुर्सत से तुम्हारी याद में उदास बैठे हैं।
Shayari
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दुश्मनी
एक नाम क्या लिखा तेरा साहिल की रेत पर,
फिर उम्र भर हवा से मेरी दुश्मनी रही।
फिर उम्र भर हवा से मेरी दुश्मनी रही।
Shayari
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अलफ़ाज़
अलफ़ाज़ के कुछ ज़ायके ज़ुबाँ पे रहने दो,
कुछ बातें ऐसी भी हैं जो खामोश अच्छी हैं।
कुछ बातें ऐसी भी हैं जो खामोश अच्छी हैं।
Shayari
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सिगरेट के धुएँ का अक्स
वो जा चुकी है, मैं सब कुछ फ़ना कर रहा हूँ,
मैं जल रहा हूँ और सबको धुआँ' कर रहा हूँ।
ये राख 'बिखरी' नहीं है, ये 'क़िस्सा' है मेरा,
मैं अपनी 'उम्र' का 'हासिल' 'बयाँ' कर रहा हूँ।
जो 'साँस' 'अंदर'...
मैं जल रहा हूँ और सबको धुआँ' कर रहा हूँ।
ये राख 'बिखरी' नहीं है, ये 'क़िस्सा' है मेरा,
मैं अपनी 'उम्र' का 'हासिल' 'बयाँ' कर रहा हूँ।
जो 'साँस' 'अंदर'...
Shayari
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दिन ढला, दीप जला
दिन का सफ़र सिमट कर अब ढल रहा है,
घर के अँधेरे कोने में इक दीप जल रहा है।
रिश्तों पे जम गई थी जो बर्फ़ पिछली शब,
देखो, चिराग़ की गर्मी से वो भी पिघल रहा है।
बाहर का शोरगुल तो बस कुछ पलों का मेहमान...
घर के अँधेरे कोने में इक दीप जल रहा है।
रिश्तों पे जम गई थी जो बर्फ़ पिछली शब,
देखो, चिराग़ की गर्मी से वो भी पिघल रहा है।
बाहर का शोरगुल तो बस कुछ पलों का मेहमान...
Shayari
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पीछे है
हर कोई दौड़ रहा है, एक सराब के पीछे है
असली चेहरा कहाँ है, सब नक़ाब के पीछे है
रूह की सादगी को यहाँ कौन पूछता है
दुनिया तो बस जिस्म की आब-ओ-ताब के पीछे है
न दिन में चैन है किसी को, न रातों में स...
असली चेहरा कहाँ है, सब नक़ाब के पीछे है
रूह की सादगी को यहाँ कौन पूछता है
दुनिया तो बस जिस्म की आब-ओ-ताब के पीछे है
न दिन में चैन है किसी को, न रातों में स...
Shayari
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ढूंढता हूँ
इस ज़िन्दगी के सफ़र में अपना निशान ढूंढता हूँ
मैं भीड़ में खो गया हूँ, एक इंसान ढूंढता हूँ
ज़मीन की तल्ख़ियों से दिल बहुत घबरा गया है
परिंदों की तरह अब खुला आसमान ढूंढता हूँ
यहाँ हर शख़्स की क़ी...
मैं भीड़ में खो गया हूँ, एक इंसान ढूंढता हूँ
ज़मीन की तल्ख़ियों से दिल बहुत घबरा गया है
परिंदों की तरह अब खुला आसमान ढूंढता हूँ
यहाँ हर शख़्स की क़ी...