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मौत की राजधानी

ये कैसा 'कोहरा' है जो अब छंटता नहीं,
सूरज भी अब इस शहर में निकलता नहीं।
हवाओं में यह कैसी ज़हर की मिलावट है,
साँस लेना भी अब तो, एक बगावत है।

सुनों ए तख्त पर बैठे हुए 'सियासत के खुदाओ',
जरा शीश...
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अब आए हो?

तो... आ ही गए।
मेरी कामयाबी की गंध तुम्हें खींच ही लाई, जैसे लाश की महक गिद्धों को ले आती है।
क्या चाहिए?
हिस्सा? हमदर्दी? या बस मेरे जले हुए ज़ख़्मों पर नमक छिड़कने का नया तरीका ढूँढ लाए हो?
अरे,...
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वापसी

सुनो शहर...
अब अपने इन ऊँचे मकानों की खिड़कियाँ बंद कर लो,
क्योंकि वह 'शायर',
जो तुम्हारी सड़कों पर लफ़्ज़ ढूंढता फिरता था,
आज अपना कलम तोड़कर जा रहा है।
बहुत जी लिया इन पत्थरों के बीच,
यहाँ भीड़ तो ब...
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माँ,

इस छोटे से कमरे में, कैसी ये वीरानी छाई है माँ,
आज फिर इस काली रात में, तेरी बहुत याद आई है माँ।
बुख़ार से तप रहा है बदन, और पानी पूछने वाला कोई नहीं,
मेरे माथे पर तेरे ठंडे हाथ की, वो नरमी याद आई ...
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इंसान नहीं, किरदार हो तुम

चेहरे पे चेहरा लगाते हो, बड़े अदाकार हो तुम,
सच कहूँ तो इंसान नहीं, बस एक किरदार हो तुम।
अपनी मर्ज़ी से कहाँ एक साँस भी लेते हो यहाँ?
ज़माने के हाथों में, बिकने वाले अख़बार हो तुम।

तुम्हें लगता है क...
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अपूर्ण हो तुम

कान्हा, भ्रम में मत रहना...
कि तुम 'पूर्ण' हो।
ज़रा अपने नाम के आगे से मेरा नाम हटाकर तो देखो,
तुम 'राधा-कृष्ण' से घटकर... महज़ एक 'किस्सा' रह जाओगे।
संसार तुम्हें 'ईश्वर' कहता है,
पर भूलना मत...
...
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मेरी प्यारी माँ

आज फिर वही तारीख है...
वो दिन, जब मेरे सर से 'छत' और पैरों के नीचे से 'ज़मीन' एक साथ खिसक गई थी।
सब कहते हैं कि वक़्त के साथ सब ठीक हो जाता है,
पर माँ... झूठ कहते हैं वो।
वक़्त सिर्फ़ आंसू छुपाना सिखा...
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तुम, मैं और हमारा अनंत प्रेम

तुम मेरे कृष्णा, मैं तुम्हारी राधा,
तुमसे ही जुड़ी है मेरी हर एक बाधा।
संसार के लिए तुम पूजनीय भगवान हो,
पर मेरे लिए... तुम मेरा अभिमान हो।

सुनो...
तुम अगर 'मौन' हो, तो मैं तुम्हारी 'भाषा' हूँ,
...
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भगोड़े भगवान

जब मेहनत की रोटी कमाना इनके बस की बात न थी,
ज़िंदगी की धूप में तपना इनकी औकात न थी।
छोड़कर रणभूमि को, ये कायर फ़रार हो गए,
कपड़े रंगे गेरुआ, और 'धर्म के ठेकेदार' हो गए।

जो ख़ुद ज़िंदगी की जंग में लड़ न...