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Explore our collection of 56 beautiful poems
Ghazal
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यानी... तुम अब भी?
अब मेरा हाल पूछने आए हो? कमाल करते हो!
मैंने तो सब भुला दिया, तुम क्यों मलाल करते हो?
वो जो एक शख़्स था, वो कब का मर गया मुझ में,
तुम अब क़ब्र पर आकर, क्यों आँखें लाल करते हो?
छोड़ो... जाने दो.....
मैंने तो सब भुला दिया, तुम क्यों मलाल करते हो?
वो जो एक शख़्स था, वो कब का मर गया मुझ में,
तुम अब क़ब्र पर आकर, क्यों आँखें लाल करते हो?
छोड़ो... जाने दो.....
Ghazal
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सुकून-ए-दीदार
हज़ारों उलझनें हैं ज़हन में, मगर सब भूल जाता हूँ,
मैं उसको देख लूँ पल भर, तो दिल को सुकून आए।
भटकता हूँ मैं दिन भर धूप में दुनिया की गलियों में,
शाम को उसका चेहरा नज़र आए, तो दिल को सुकून आए।
...
मैं उसको देख लूँ पल भर, तो दिल को सुकून आए।
भटकता हूँ मैं दिन भर धूप में दुनिया की गलियों में,
शाम को उसका चेहरा नज़र आए, तो दिल को सुकून आए।
...
Ghazal
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जाम और यादें 🍷
हर रोज़ ज़हर के घूँट पीकर, मैं रोज़ मरता हूँ,
ख़बर न लग जाए किसी को, इसलिए आहिस्ता चलता हूँ।
किसी की याद ने पिछले चौराहे पे बोतल खुलवा दी,
अब उस रास्ते से गुज़रता हूँ, तो बस फिसलता हूँ।
नशा तो म...
ख़बर न लग जाए किसी को, इसलिए आहिस्ता चलता हूँ।
किसी की याद ने पिछले चौराहे पे बोतल खुलवा दी,
अब उस रास्ते से गुज़रता हूँ, तो बस फिसलता हूँ।
नशा तो म...
Ghazal
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ज़मीर का आईना
"माफ़ी कीजिये", कह कर वो बड़ी सादगी से मुस्कुराये,
जैसे खंजर छुपा रखा हो अपनी आस्तीन के ठिकाने में।
उजाड़ कर किसी का जहाँ, वो जश्न मनाते हैं,
कहते हैं, "ज़िंदा हूँ मैं", बड़े फख्र से ज़माने में।
...
जैसे खंजर छुपा रखा हो अपनी आस्तीन के ठिकाने में।
उजाड़ कर किसी का जहाँ, वो जश्न मनाते हैं,
कहते हैं, "ज़िंदा हूँ मैं", बड़े फख्र से ज़माने में।
...
Ghazal
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गुज़रा ज़माना
आज बैठिये, शुक्रिया महफ़िल में आने में,
जाम पीजिये और चले जाइये गुज़रे ज़माने में।
वो जो कभी इंतेज़ार में रहती थी तुम्हारे,
अब किसी और का वक़्त पूछती है घर आने में।
तुम्हें गुरूर था अपने हुनर पे...
जाम पीजिये और चले जाइये गुज़रे ज़माने में।
वो जो कभी इंतेज़ार में रहती थी तुम्हारे,
अब किसी और का वक़्त पूछती है घर आने में।
तुम्हें गुरूर था अपने हुनर पे...
Ghazal
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एनिवर्सरी मुबारक
आज फिर से मुबारकबाद देने का दिन आया है,
वाह भाई! तुमने एक और साल कामयाबी से निभाया है!
कल तक जो बंदा दोस्तों की महफ़िल की शान था,
आज "सब्ज़ी ले आना" पे घर भागा आया है।
भाभी जी की 'हां' में 'हां'...
वाह भाई! तुमने एक और साल कामयाबी से निभाया है!
कल तक जो बंदा दोस्तों की महफ़िल की शान था,
आज "सब्ज़ी ले आना" पे घर भागा आया है।
भाभी जी की 'हां' में 'हां'...
Ghazal
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पेग
सुकून तो मिलता है महफ़िलें जमाने में,
मगर अकेले पीता है वीडियो कॉल पे इस ज़माने में।
दिल तो जलता है उसकी गैर-हाज़िरी से,
आग लगे तेरी यादों को, हम तो पीते हैं सर्दी भगाने में।
दिन की थकान, ऑफ़िस ...
मगर अकेले पीता है वीडियो कॉल पे इस ज़माने में।
दिल तो जलता है उसकी गैर-हाज़िरी से,
आग लगे तेरी यादों को, हम तो पीते हैं सर्दी भगाने में।
दिन की थकान, ऑफ़िस ...
Ghazal
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गाँव का तहख़ाना
उम्र गुज़र जाएगी मेरी इस शहर के ज़माने में,
फिर लौटकर जाऊँगा मैं, फिर उसी मेरे गाँव के तहख़ाने में।
यहाँ की रौनक़ें सब ख़्वाब हैं, सब खोखले से हैं,
वो जो 'सच' है, वो रखा है उसी पुराने में।
जहाँ ...
फिर लौटकर जाऊँगा मैं, फिर उसी मेरे गाँव के तहख़ाने में।
यहाँ की रौनक़ें सब ख़्वाब हैं, सब खोखले से हैं,
वो जो 'सच' है, वो रखा है उसी पुराने में।
जहाँ ...
Ghazal
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कलाकार का गाँव
ख़याल में एक गाँव पहले बना दिया,
फिर अपने हाथ से उसको वहीं जला दिया।
वो जलता रहा और मैं हाथ सेंकता रहा,
उसी की आग को मैंने ही और हवा दिया।
बड़े ही शौक़ से रंग भरे थे कल जिसमें,
हर एक घर को बड़े...
फिर अपने हाथ से उसको वहीं जला दिया।
वो जलता रहा और मैं हाथ सेंकता रहा,
उसी की आग को मैंने ही और हवा दिया।
बड़े ही शौक़ से रंग भरे थे कल जिसमें,
हर एक घर को बड़े...
Ghazal
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ठिकाना
ये क़ब्रिस्तान ही मेरा ठिकाना है मेरा,
यही सुनसान वीराना है मेरा।
वो खोपड़ी जो पड़ी है, वो दोस्त है मेरी,
ये सारा मुर्दा ज़माना है मेरा।
मैं रूह से बातें करता हूँ रात भर,
ये सिलसिला बड़ा पुरा...
यही सुनसान वीराना है मेरा।
वो खोपड़ी जो पड़ी है, वो दोस्त है मेरी,
ये सारा मुर्दा ज़माना है मेरा।
मैं रूह से बातें करता हूँ रात भर,
ये सिलसिला बड़ा पुरा...
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सन्नाटा
जहाँ पे रूह भटकती हैं, वो ठिकाना है मेरा,
ये क़ब्रिस्तान ही असली अफ़साना है मेरा।
तुम्हें है ख़ौफ़ अँधेरे का, और सन्नाटे का डर,
इन्हीं से तो पुराना इक दोस्ताना है मेरा।
जहाँ पे जिस्म सड़ते हैं...
ये क़ब्रिस्तान ही असली अफ़साना है मेरा।
तुम्हें है ख़ौफ़ अँधेरे का, और सन्नाटे का डर,
इन्हीं से तो पुराना इक दोस्ताना है मेरा।
जहाँ पे जिस्म सड़ते हैं...
Ghazal
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क़ब्रिस्तान
तुम्हें आबादी मुबारक, मैं वीराने में रहता हूँ,
जहाँ मुर्दे सुलगते हैं, मैं उस शमशाने में रहता हूँ।
तुम्हें मख़मल के बिस्तर की ज़रूरत होगी,
मैं जहाँ हड्डियाँ गलती हैं, उस तहख़ाने में रहता हूँ।
...
जहाँ मुर्दे सुलगते हैं, मैं उस शमशाने में रहता हूँ।
तुम्हें मख़मल के बिस्तर की ज़रूरत होगी,
मैं जहाँ हड्डियाँ गलती हैं, उस तहख़ाने में रहता हूँ।
...