Ghazal
आदत
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December 12, 2025
चेहरे पे चेहरा हर घड़ी चढ़ाने की आदत है।
दुनिया को झूठे ख़्वाब ही दिखाने की आदत है।
जब काम हो तो पास वो आ जाने की आदत है।
मक़सद हुआ पूरा, तो कतराने की आदत है।
महफ़िल में ऊँची हिकमतें सुनाने की आदत है।
तन्हाई में किरदार को गिराने की आदत है।
ख़ुद के गिरेबाँ में कभी झाँका नहीं उसने,
औरों पे उँगली बस उसे उठाने की आदत है।
दिल में भरा है ज़हर, लबों पे शहद देखो,
मीठी छुरी को इस तरह चलाने की आदत है।
इंसान की फ़ितरत पे क्या हैरान होना अब,
सदियों से उसको रस्म ये निभाने की आदत है।
दुनिया को झूठे ख़्वाब ही दिखाने की आदत है।
जब काम हो तो पास वो आ जाने की आदत है।
मक़सद हुआ पूरा, तो कतराने की आदत है।
महफ़िल में ऊँची हिकमतें सुनाने की आदत है।
तन्हाई में किरदार को गिराने की आदत है।
ख़ुद के गिरेबाँ में कभी झाँका नहीं उसने,
औरों पे उँगली बस उसे उठाने की आदत है।
दिल में भरा है ज़हर, लबों पे शहद देखो,
मीठी छुरी को इस तरह चलाने की आदत है।
इंसान की फ़ितरत पे क्या हैरान होना अब,
सदियों से उसको रस्म ये निभाने की आदत है।
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