Ghazal

आसान नहीं होता

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​हर दर्द-ए-दिल ज़ुबाँ से बयाँ नहीं होता,
मोहब्बत का सफ़र इतना आसान नहीं होता।
​हँसी के पीछे छुपा लेती है दुनिया ग़म को,
हर ज़ख्म का जिस्म पर निशान नहीं होता।
​ज़मीन वालों की ख्वाहिशें बहुत हैं मगर,
सबके हिस्से में पूरा आसमान नहीं होता।
​जो दिल से उतर जाए, वो फिर नहीं मिलता,
टूटे हुए रिश्तों का कोई मकान नहीं होता।
​चलो 'राज़' अब खामोशी ही बेहतर है यहाँ,
लफ़्ज़ों से हर जज़्बात का गुमान नहीं होता।

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