Nazm

इंसान नहीं, किरदार हो तुम

13 views December 12, 2025
चेहरे पे चेहरा लगाते हो, बड़े अदाकार हो तुम,
सच कहूँ तो इंसान नहीं, बस एक किरदार हो तुम।
अपनी मर्ज़ी से कहाँ एक साँस भी लेते हो यहाँ?
ज़माने के हाथों में, बिकने वाले अख़बार हो तुम।

तुम्हें लगता है कि दुनिया तुम्हारे वजूद को पूजती है?
ग़लतफ़हमी है ज़िगर,, ज़रूरत के वक़्त का बस औज़ार हो तुम।

बाहर से तो दिखाते हो कि बहुत खुश-हाल हो,
मगर अकेले में मिलो, तो अंदर से बीमार हो तुम।

झूठ को सच साबित करने में, क्या ख़ूब माहिर हो,
साज़िशों के बने हुए, एक ज़िंदा शाहकार हो तुम।

ज़िगर शायर ने पढ़ ली है, तुम्हारी आँखों की गहराई,
मासूमियत का नक़ाब ओढ़े, बड़े गुनहगार हो तुम।
चेहरे पे चेहरा लगाते हो, बड़े अदाकार हो तुम,
सच कहूँ तो इंसान नहीं, बस एक किरदार हो तुम।

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