Ghazal

औकात दिखा दी

17 views January 1, 1970
जो लोग मेरी इज़्ज़त के काबिल नहीं थे,
उन्हें हमने अपनी नज़रों से गिरा दिया।

बहुत शौक था उन्हें हमारे जज़्बातों से खेलने का,
हमने बाज़ी ही पलट दी और उन्हें हरा दिया।

जो समझते थे खुद को बादशाह मेरी दुनिया का,
वक़्त आने पर उन्हें 'आईना' दिखा दिया।

अब कोई फर्क नहीं पड़ता किसी के रूठ जाने से,
हमने दिल से हर झूठी उम्मीद को मिटा दिया।

वो चाहते थे कि हम बिखर जाएँ टूट कर,
हमने हँस कर उनका ये वहम भी जला दिया।

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