Ghazal

कलाकार का गाँव

12 views December 12, 2025
ख़याल में एक गाँव पहले बना दिया,
फिर अपने हाथ से उसको वहीं जला दिया।
वो जलता रहा और मैं हाथ सेंकता रहा,
उसी की आग को मैंने ही और हवा दिया।

बड़े ही शौक़ से रंग भरे थे कल जिसमें,
हर एक घर को बड़े नाज़ से सजा दिया।

ये मेरा हक़ था, कि वो मेरी ही मिल्कियत (property) थी,
जिसे बनाया था मैंने, उसे मिटा दिया।

मुझे पसंद नहीं 'अंत' कोई और लिखे,
सो अपनी चीज़ का अंजाम ख़ुद लिखा दिया।

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