Ghazal

गुज़रा ज़माना

15 views December 12, 2025
आज बैठिये, शुक्रिया महफ़िल में आने में,
जाम पीजिये और चले जाइये गुज़रे ज़माने में।
वो जो कभी इंतेज़ार में रहती थी तुम्हारे,
अब किसी और का वक़्त पूछती है घर आने में।

तुम्हें गुरूर था अपने हुनर पे बहुत,
उसे देर ना लगी तुम्हें दिल से गिराने में।

फिसल गई रेत मुट्ठी से, तुम्हें इल्म भी न हुआ,
तुम मशगूल थे बस नए ख़्वाब सजाने में।

हम तो वहीं खड़े रहे, जहाँ तुमने छोड़ा था,
तुम ही को देर हो गई वापस बुलाने में।

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