Ghazal
गुमशुदा हो गया
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December 12, 2025
मैं खुद को ढूँढने निकला था, गुमशुदा हो गया,
ये कैसा सफ़र था, जो खुद से ही जुदा हो गया।
बहुत सँभल के चला था मैं ज़िंदगी की राह में,
ज़रा सी आँख क्या झपकी, हादसा हो गया।
वही वो शख्स था, जिस पर मुझे गुरूर बहुत था,
वक्त बदला, तो वो शख्स भी 'खुदा' हो गया।
खबर न हुई किसी को मेरी तबाही की यहाँ,
मेरा हर दर्द मेरी हँसी में अदा हो गया।
उसे तो बस एक बहाना चाहिए था जाने का,
हवा का रुख मुड़ा और वो हवा हो गया।
ये कैसा सफ़र था, जो खुद से ही जुदा हो गया।
बहुत सँभल के चला था मैं ज़िंदगी की राह में,
ज़रा सी आँख क्या झपकी, हादसा हो गया।
वही वो शख्स था, जिस पर मुझे गुरूर बहुत था,
वक्त बदला, तो वो शख्स भी 'खुदा' हो गया।
खबर न हुई किसी को मेरी तबाही की यहाँ,
मेरा हर दर्द मेरी हँसी में अदा हो गया।
उसे तो बस एक बहाना चाहिए था जाने का,
हवा का रुख मुड़ा और वो हवा हो गया।
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