Ghazal
छोड़ दिया
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December 14, 2025
हमने अब लोगों को मनाना छोड़ दिया,
हर बात पर सफाई देना और बताना छोड़ दिया।
परख लिया है हमने इस मतलबी ज़माने को,
अब गैरों को अपना बनाना छोड़ दिया।
लोग तमाशा बनाते हैं अक्सर जज़्बातों का,
इसलिये महफ़िल में अब आँसू बहाना छोड़ दिया।
उम्मीदें इंसान को अंदर से खोखला कर देती हैं,
हमने अब किसी से दिल लगाना छोड़ दिया।
जहाँ कद्र न हो, वहाँ झुकना फ़िज़ूल है,
ऐसी चौखट पर अब हमने आना-जाना छोड़ दिया।
हर बात पर सफाई देना और बताना छोड़ दिया।
परख लिया है हमने इस मतलबी ज़माने को,
अब गैरों को अपना बनाना छोड़ दिया।
लोग तमाशा बनाते हैं अक्सर जज़्बातों का,
इसलिये महफ़िल में अब आँसू बहाना छोड़ दिया।
उम्मीदें इंसान को अंदर से खोखला कर देती हैं,
हमने अब किसी से दिल लगाना छोड़ दिया।
जहाँ कद्र न हो, वहाँ झुकना फ़िज़ूल है,
ऐसी चौखट पर अब हमने आना-जाना छोड़ दिया।
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