Ghazal

छोड़ दिया

18 views December 14, 2025
हमने अब लोगों को मनाना छोड़ दिया,
हर बात पर सफाई देना और बताना छोड़ दिया।

परख लिया है हमने इस मतलबी ज़माने को,
अब गैरों को अपना बनाना छोड़ दिया।

लोग तमाशा बनाते हैं अक्सर जज़्बातों का,
इसलिये महफ़िल में अब आँसू बहाना छोड़ दिया।

उम्मीदें इंसान को अंदर से खोखला कर देती हैं,
हमने अब किसी से दिल लगाना छोड़ दिया।

जहाँ कद्र न हो, वहाँ झुकना फ़िज़ूल है,
ऐसी चौखट पर अब हमने आना-जाना छोड़ दिया।

More from Ghazal

हुनर लफ़्ज़ों का बाज़ार में बिक सकता है बेशक,
मगर एहसास का दुनिया में कोई बाज़ार नहीं होता।
ये वो दौलत है जो रूह के जल...
​लफ़्ज़ों को जोड़ना तो बस एक हुनर है दुनिया का,
मगर याद रखना, एहसास की कोई दुकान नहीं होती।
​कलेजा चाहिए होता है लफ़्ज़ों म...
मेरे दिल में गूँजता हुआ, एक सवाल हो तुम,
हकीकत हो मेरी, या सिर्फ एक खयाल हो तुम।
कभी लगता है कि सदियों पुरानी पहचान है...