Ghazal
ज़माने बदल गए
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December 12, 2025
बड़ी खामोशी से वो रिश्ते बदल गए,
हम वही रहे, मगर ज़माने बदल गए।
जिन्हें कहते थे हम अपनी ज़िंदगी कभी,
देखते ही देखते उनके ठिकाने बदल गए।
वक़्त की आँधी ने कैसा रुख मोड़ लिया,
पेड़ वही हैं, मगर आशियाने बदल गए।
कल तक जो करते थे वादे साथ चलने के,
मंज़िल करीब आई तो रास्ते बदल गए।
अब किस से करें उम्मीद-ए-वफ़ा हम यहाँ,
जब अपने ही लोगों के फसाने बदल गए।
हम वही रहे, मगर ज़माने बदल गए।
जिन्हें कहते थे हम अपनी ज़िंदगी कभी,
देखते ही देखते उनके ठिकाने बदल गए।
वक़्त की आँधी ने कैसा रुख मोड़ लिया,
पेड़ वही हैं, मगर आशियाने बदल गए।
कल तक जो करते थे वादे साथ चलने के,
मंज़िल करीब आई तो रास्ते बदल गए।
अब किस से करें उम्मीद-ए-वफ़ा हम यहाँ,
जब अपने ही लोगों के फसाने बदल गए।
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