Ghazal
दर्द का कारोबार
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December 12, 2025
तेरे जाने के बाद, शायरी का कारोबार चलने लग गया,
हर महफ़िल में अब, मेरे नाम का जाम चलने लग गया।
तूने सोचा था कि टूट कर बिखर जाऊँगा मैं तन्हाई में,
मगर देख, मेरे आंसुओं का ही दाम चलने लग गया।
एक फ़क़त तूने ही तो छोड़ा था मेरा हाथ उस मोड़ पर,
उसी मोड़ से मेरी शोहरत का काम चलने लग गया।
कल तक जो ताने देते थे मेरे आवारापन पे,
आज उनकी ज़ुबाँ पर भी, मेरा ही कलाम चलने लग गया।
तूने जिसे 'बेकार' समझ कर नज़र से गिरा दिया था,
देख, अब शायरों की बस्ती में, उसका नाम चलने लग गया।
इस ज़िगर को पहले कोई जानता भी न था इस शहर में,
तुझ पर लिखी ग़ज़लों से, यह शख़्स आम से खास चलने लग गया।
हर महफ़िल में अब, मेरे नाम का जाम चलने लग गया।
तूने सोचा था कि टूट कर बिखर जाऊँगा मैं तन्हाई में,
मगर देख, मेरे आंसुओं का ही दाम चलने लग गया।
एक फ़क़त तूने ही तो छोड़ा था मेरा हाथ उस मोड़ पर,
उसी मोड़ से मेरी शोहरत का काम चलने लग गया।
कल तक जो ताने देते थे मेरे आवारापन पे,
आज उनकी ज़ुबाँ पर भी, मेरा ही कलाम चलने लग गया।
तूने जिसे 'बेकार' समझ कर नज़र से गिरा दिया था,
देख, अब शायरों की बस्ती में, उसका नाम चलने लग गया।
इस ज़िगर को पहले कोई जानता भी न था इस शहर में,
तुझ पर लिखी ग़ज़लों से, यह शख़्स आम से खास चलने लग गया।
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ये वो दौलत है जो रूह के जल...
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