Kavita
नज़रिये की बात
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December 14, 2025
कभी ब्राह्मण प्यासा भी हो सकता है
शूद्रों का अपना कुआँ भी हो सकता है
धुँध समझकर मास्क मत हटाना
देश की हवा में धुआँ भी हो सकता है
जिस गंगा में तुम अपने पाप धो रहे हो
उसका पानी अछूत का छुआ भी हो सकता है
ज़रूरी नहीं नीच हरकत नीच ही करेगा
इसके पीछे घराना, बड़ा भी हो सकता है
उसे देवी बनाकर पत्थर मत कर देना
औरत का कोई सपना भी हो सकता है
बिटिया की 'ना' को तुम 'हाँ' मत समझना
ख़ामोशी का मतलब बहूआ भी हो सकता है
जो तख़्त पर बैठा है, चूर अहंकार में
कल वो सड़क पर खड़ा भी हो सकता है
किसी की कलम को हल्के में मत लेना
कल कोई शायर 'बावला' भी हो सकता है
शूद्रों का अपना कुआँ भी हो सकता है
धुँध समझकर मास्क मत हटाना
देश की हवा में धुआँ भी हो सकता है
जिस गंगा में तुम अपने पाप धो रहे हो
उसका पानी अछूत का छुआ भी हो सकता है
ज़रूरी नहीं नीच हरकत नीच ही करेगा
इसके पीछे घराना, बड़ा भी हो सकता है
उसे देवी बनाकर पत्थर मत कर देना
औरत का कोई सपना भी हो सकता है
बिटिया की 'ना' को तुम 'हाँ' मत समझना
ख़ामोशी का मतलब बहूआ भी हो सकता है
जो तख़्त पर बैठा है, चूर अहंकार में
कल वो सड़क पर खड़ा भी हो सकता है
किसी की कलम को हल्के में मत लेना
कल कोई शायर 'बावला' भी हो सकता है
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आंखें आती थी झलक
आज उसी से लड़ रहे है हम
जिस तरह कभी भी सोचा न था
वो कुछ इस कदर कर रहे है हम
ज...
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