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नज़रिये की बात

15 views December 14, 2025
कभी ब्राह्मण प्यासा भी हो सकता है
शूद्रों का अपना कुआँ भी हो सकता है
​धुँध समझकर मास्क मत हटाना
देश की हवा में धुआँ भी हो सकता है
​जिस गंगा में तुम अपने पाप धो रहे हो
उसका पानी अछूत का छुआ भी हो सकता है
​ज़रूरी नहीं नीच हरकत नीच ही करेगा
इसके पीछे घराना, बड़ा भी हो सकता है
​उसे देवी बनाकर पत्थर मत कर देना
औरत का कोई सपना भी हो सकता है
​बिटिया की 'ना' को तुम 'हाँ' मत समझना
ख़ामोशी का मतलब बहूआ भी हो सकता है
​जो तख़्त पर बैठा है, चूर अहंकार में
कल वो सड़क पर खड़ा भी हो सकता है
​किसी की कलम को हल्के में मत लेना
कल कोई शायर 'बावला' भी हो सकता है
Jaswant kumar

Jaswant kumar

Poet and writer

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