Ghazal

यानी... तुम अब भी?

13 views December 12, 2025
अब मेरा हाल पूछने आए हो? कमाल करते हो!
मैंने तो सब भुला दिया, तुम क्यों मलाल करते हो?
वो जो एक शख़्स था, वो कब का मर गया मुझ में,
तुम अब क़ब्र पर आकर, क्यों आँखें लाल करते हो?

छोड़ो... जाने दो... ये पुरानी बातें हैं...
यानी, अब भी तुम वफ़ा की, झूठी मिसाल बनते हो?

हमने तो अपनी पूरी ज़िंदगी, मज़ाक़ में गुज़ार दी,
और एक तुम हो, जो हर बात पे सवाल करते हो।

अजीब पागलपन है, राख को कुरेदने का तुम्हें...
सब जल गया, अब राख में क्या तलाश करते हो?
अब मेरा हाल पूछने आए हो? कमाल करते हो!

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