Rubai
राख
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January 1, 1970
राख में दबी चिंगारी कुरेदते क्यों हो?
जो भूल चुके हैं हमें, उन्हें ढूँढ़ते क्यों हो?
यह दिल तो कब का बन चुका है पत्थर दोस्तों,
अब इसके टूटने की आवाज़ सुनना चाहते क्यों हो?
जो भूल चुके हैं हमें, उन्हें ढूँढ़ते क्यों हो?
यह दिल तो कब का बन चुका है पत्थर दोस्तों,
अब इसके टूटने की आवाज़ सुनना चाहते क्यों हो?
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दिल में बस एक दबे पाँव सवाल रह गया।
हमने तो चाहा था उन्हें ज़िंदगी से बढ़कर,
अब उन...
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शाम का वक़्त हो, और हल्की सी ठंडी हवा हो जाए,
बस हम दोनों बैठे हों, और शोर थोड़ा कम हो जाए,
तुम बस मुस्कुराते हुए किचन स...
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