Ghazal
शुरू होने से पहले
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January 1, 1970
तुझे खोने का डर था पाने से पहले,
ख़त्म किस्सा हुआ शुरू होने से पहले।
बहुत रोए हैं हम मुस्कुराने से पहले,
ज़रा सोचो किसी का दिल दुखाने से पहले।
खबर होती अगर ये अंजाम-ए-मोहब्बत,
मुकर जाते कसम हम खाने से पहले।
मेरा घर जल रहा था और वो खुश थे,
तमाशा देखने आए बुझाने से पहले।
यही दस्तूर है इस दुनिया का यारो,
सब अपने बनते हैं आज़माने से पहले।
ख़त्म किस्सा हुआ शुरू होने से पहले।
बहुत रोए हैं हम मुस्कुराने से पहले,
ज़रा सोचो किसी का दिल दुखाने से पहले।
खबर होती अगर ये अंजाम-ए-मोहब्बत,
मुकर जाते कसम हम खाने से पहले।
मेरा घर जल रहा था और वो खुश थे,
तमाशा देखने आए बुझाने से पहले।
यही दस्तूर है इस दुनिया का यारो,
सब अपने बनते हैं आज़माने से पहले।
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ये वो दौलत है जो रूह के जल...
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