Ghazal

सुकून-ए-दीदार

11 views December 12, 2025
हज़ारों उलझनें हैं ज़हन में, मगर सब भूल जाता हूँ,
मैं उसको देख लूँ पल भर, तो दिल को सुकून आए।

भटकता हूँ मैं दिन भर धूप में दुनिया की गलियों में,
शाम को उसका चेहरा नज़र आए, तो दिल को सुकून आए।

न कोई दवा काम करती है, न दुआ असर लाती है,
वो बस एक बार मुस्कुराए, तो दिल को सुकून आए।

शोर दुनिया का मेरे कानों को अब भाता नहीं हरगिज़,
उसकी पायल की छन-छन सुन लूँ, तो दिल को सुकून आए।

'ज़िगर' बस यही दौलत कमाई है मोहब्बत में,
वो मेरे पास बैठ जाए, तो रूह को सुकून आए।

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