Ghazal

सौदा नहीं किया

16 views December 12, 2025
इसमें एक ऐसे इंसान की ज़िद है जिसने अपनी भावनाओं और उसूलों को दुनिया के लालच में बिकने नहीं दिया

लाख आए ख़रीदार, मगर सौदा नहीं किया,
हमने दिल को दिल रखा, बाज़ार नहीं होने दिया।
बिक गए लोग यहाँ, चंद सिक्कों की खनक पर,
मैंने गरीबी में भी मैला, अपना किरदार नहीं होने दिया।

यहाँ हर शख्स अपने दर्दों की नुमाइश करता है,
मैंने अपने ज़ख्मों का कभी, इश्तेहार नहीं होने दिया।

बहुत आए, जो इसे 'सराय' समझ कर ठहरना चाहते थे,
मैंने इस घर को कभी, दीवार नहीं होने दिया।

सबने कहा कि झुक जाओ, ज़माना झुकने वालों का है,
मैंने कटवा दी गर्दन, मगर सर को शर्म-सार नहीं होने दिया।

ज़िगर शायर की बस यही एक कमाई है पूरी ज़िंदगी की,
भीड़ बहुत थी, मगर खुद को कभी शुमार नहीं होने दिया।
लाख आए ख़रीदार, मगर सौदा नहीं किया,
हमने दिल को दिल रखा, बाज़ार नहीं होने दिया।

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