Ghazal
संभाल रखा है
10 views
December 12, 2025
तेरी यादों को दिल में बसा रखा है,
हमने खुद को दुनिया से छुपा रखा है।
हवाओं से कह दो कि ज़ोर न लगाएँ,
एक चिराग-ए-उम्मीद जला रखा है।
वो आएंगे शायद इसी रास्ते से कहीं,
नज़रों को दहलीज़ पे बिछा रखा है।
पूछते हैं लोग मेरी बर्बादी का सबब,
मैंने होंठों पे तेरा नाम बचा रखा है।
ये और बात है कि वो मिले नहीं अब तक,
मगर इस दिल ने फासला मिटा रखा है।
हमने खुद को दुनिया से छुपा रखा है।
हवाओं से कह दो कि ज़ोर न लगाएँ,
एक चिराग-ए-उम्मीद जला रखा है।
वो आएंगे शायद इसी रास्ते से कहीं,
नज़रों को दहलीज़ पे बिछा रखा है।
पूछते हैं लोग मेरी बर्बादी का सबब,
मैंने होंठों पे तेरा नाम बचा रखा है।
ये और बात है कि वो मिले नहीं अब तक,
मगर इस दिल ने फासला मिटा रखा है।
Share This Poem
More from Ghazal
हुनर लफ़्ज़ों का बाज़ार में बिक सकता है बेशक,
मगर एहसास का दुनिया में कोई बाज़ार नहीं होता।
ये वो दौलत है जो रूह के जल...
मगर एहसास का दुनिया में कोई बाज़ार नहीं होता।
ये वो दौलत है जो रूह के जल...
लफ़्ज़ों को जोड़ना तो बस एक हुनर है दुनिया का,
मगर याद रखना, एहसास की कोई दुकान नहीं होती।
कलेजा चाहिए होता है लफ़्ज़ों म...
मगर याद रखना, एहसास की कोई दुकान नहीं होती।
कलेजा चाहिए होता है लफ़्ज़ों म...
मेरे दिल में गूँजता हुआ, एक सवाल हो तुम,
हकीकत हो मेरी, या सिर्फ एक खयाल हो तुम।
कभी लगता है कि सदियों पुरानी पहचान है...
हकीकत हो मेरी, या सिर्फ एक खयाल हो तुम।
कभी लगता है कि सदियों पुरानी पहचान है...