Ghazal

सुलगते लोग और मेरी नींदें

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ये लाल आँखें, ये बे-नींद रातें, सब मेरी 'मेहनत' की निशानी है,
दुनिया की 'पिछवाड़े' की आग से तो, ये कई गुना बेहतर कहानी है।

मेरी आँखों में जलन है, क्योंकि मेरे सपने बड़े हैं,
तेरी 'तशरीफ़' में जलन है, क्योंकि हम तुझसे आगे खड़े हैं।

जागना मंज़ूर है मुझे, अपने सुकून को खोकर,
कम से कम मैं जल तो नहीं रहा, किसी और का होकर।

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