Shayari
हजारों महफिलें
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December 13, 2025
हजारों महफिलें हैं और लाखों मेले हैं,
पर जहाँ तुम नहीं, वहाँ हम अकेले हैं।
पर जहाँ तुम नहीं, वहाँ हम अकेले हैं।
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जो किए ही नहीं कभी मैंने
वो भी वादे निभा रहा हूँ मैं
मुझसे फिर बात कर रही है वो
फिर से बातों में आ रहा हूँ मैं
वो भी वादे निभा रहा हूँ मैं
मुझसे फिर बात कर रही है वो
फिर से बातों में आ रहा हूँ मैं
काँच का तोहफा न देना कभी, रूठ कर लोग 'तोड़' दिया करते हैं,
जो बहुत अच्छे हों, उन्हें अक्सर लोग 'छोड़' दिया करते हैं।
जो बहुत अच्छे हों, उन्हें अक्सर लोग 'छोड़' दिया करते हैं।
मुझे तेरा साथ ज़िन्दगी भर नहीं चाहिए,
बल्कि जब तक तू साथ है, तब तक ज़िन्दगी चाहिए।
बल्कि जब तक तू साथ है, तब तक ज़िन्दगी चाहिए।