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Explore our collection of 82 beautiful poems
Ghazal
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कलाकार का गाँव
ख़याल में एक गाँव पहले बना दिया,
फिर अपने हाथ से उसको वहीं जला दिया।
वो जलता रहा और मैं हाथ सेंकता रहा,
उसी की आग को मैंने ही और हवा दिया।
बड़े ही शौक़ से रंग भरे थे कल जिसमें,
हर एक घर को बड़े...
फिर अपने हाथ से उसको वहीं जला दिया।
वो जलता रहा और मैं हाथ सेंकता रहा,
उसी की आग को मैंने ही और हवा दिया।
बड़े ही शौक़ से रंग भरे थे कल जिसमें,
हर एक घर को बड़े...
Ghazal
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ठिकाना
ये क़ब्रिस्तान ही मेरा ठिकाना है मेरा,
यही सुनसान वीराना है मेरा।
वो खोपड़ी जो पड़ी है, वो दोस्त है मेरी,
ये सारा मुर्दा ज़माना है मेरा।
मैं रूह से बातें करता हूँ रात भर,
ये सिलसिला बड़ा पुरा...
यही सुनसान वीराना है मेरा।
वो खोपड़ी जो पड़ी है, वो दोस्त है मेरी,
ये सारा मुर्दा ज़माना है मेरा।
मैं रूह से बातें करता हूँ रात भर,
ये सिलसिला बड़ा पुरा...
Ghazal
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सन्नाटा
जहाँ पे रूह भटकती हैं, वो ठिकाना है मेरा,
ये क़ब्रिस्तान ही असली अफ़साना है मेरा।
तुम्हें है ख़ौफ़ अँधेरे का, और सन्नाटे का डर,
इन्हीं से तो पुराना इक दोस्ताना है मेरा।
जहाँ पे जिस्म सड़ते हैं...
ये क़ब्रिस्तान ही असली अफ़साना है मेरा।
तुम्हें है ख़ौफ़ अँधेरे का, और सन्नाटे का डर,
इन्हीं से तो पुराना इक दोस्ताना है मेरा।
जहाँ पे जिस्म सड़ते हैं...
Ghazal
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क़ब्रिस्तान
तुम्हें आबादी मुबारक, मैं वीराने में रहता हूँ,
जहाँ मुर्दे सुलगते हैं, मैं उस शमशाने में रहता हूँ।
तुम्हें मख़मल के बिस्तर की ज़रूरत होगी,
मैं जहाँ हड्डियाँ गलती हैं, उस तहख़ाने में रहता हूँ।
...
जहाँ मुर्दे सुलगते हैं, मैं उस शमशाने में रहता हूँ।
तुम्हें मख़मल के बिस्तर की ज़रूरत होगी,
मैं जहाँ हड्डियाँ गलती हैं, उस तहख़ाने में रहता हूँ।
...
Ghazal
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चिता
मुझे शमशानों की राख ने बनाया है,
मेरे अलफ़ाज़ को मुर्दों ने ही सिखाया है।
वो दूध जो तुम ज़िंदों को नसीब न होगा,
वो मुर्दों ने मुझे बचपन में पिलाया है।
बदन को सर्दी मिटाने की क्या ज़रूरत है,
ज...
मेरे अलफ़ाज़ को मुर्दों ने ही सिखाया है।
वो दूध जो तुम ज़िंदों को नसीब न होगा,
वो मुर्दों ने मुझे बचपन में पिलाया है।
बदन को सर्दी मिटाने की क्या ज़रूरत है,
ज...
Ghazal
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ससुराल का जाड़ा
वहाँ आलस था, यहाँ फ़र्ज़ निभाना पड़ता है,
ये सर्दी हो कि गर्मी, रोज़ नहाना पड़ता है।
रज़ाई छोड़ के मायके में कौन उठता था,
यहाँ सासू जी से पहले जाग जाना पड़ता है।
पहन के सूट पे मैचिंग का शॉल ले...
ये सर्दी हो कि गर्मी, रोज़ नहाना पड़ता है।
रज़ाई छोड़ के मायके में कौन उठता था,
यहाँ सासू जी से पहले जाग जाना पड़ता है।
पहन के सूट पे मैचिंग का शॉल ले...
Ghazal
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तुम क्या चाहती हो?
तुम अपने ज़हन में, कितनी बात छुपाती हो,
खामोश रह कर भी, न जाने क्या-क्या बताती हो।
मेरे अहसास को तोलकर, मेरे लिए नई दुनिया सजाती हो,
मगर लबों से हक़ीक़त, कहने से कतराती हो।
आँखों में तो समंदर भर...
खामोश रह कर भी, न जाने क्या-क्या बताती हो।
मेरे अहसास को तोलकर, मेरे लिए नई दुनिया सजाती हो,
मगर लबों से हक़ीक़त, कहने से कतराती हो।
आँखों में तो समंदर भर...
Ghazal
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मैं जिगर रखता हूँ
हवाओं से लड़ने का, मैं अजब हुनर रखता हूँ,
अंधेरों में भी खुद को जलाने का, जिगर रखता हूँ।
थक कर बैठ जाना, मेरी फ़ितरत में नहीं शामिल,
मैं काँटों पे भी नंगे पाँव चलने का, सफ़र रखता हूँ।
ये शोहरत, ये ...
अंधेरों में भी खुद को जलाने का, जिगर रखता हूँ।
थक कर बैठ जाना, मेरी फ़ितरत में नहीं शामिल,
मैं काँटों पे भी नंगे पाँव चलने का, सफ़र रखता हूँ।
ये शोहरत, ये ...
Ghazal
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मैं वो सूरज
खैरात में मिली हुई रौशनी, मुझे अंधी कर देती है,
मैं वो सूरज हूँ, जो किसी और के अम्बर से उगा नहीं।
तुझे गुमान है कि तेरी लहरें मुझे डुबो देंगी?
मैं वो जज़ीरा (जमीन) हूँ, जो समंदर से कभी छुपा नहीं।
...
मैं वो सूरज हूँ, जो किसी और के अम्बर से उगा नहीं।
तुझे गुमान है कि तेरी लहरें मुझे डुबो देंगी?
मैं वो जज़ीरा (जमीन) हूँ, जो समंदर से कभी छुपा नहीं।
...
Ghazal
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मेरा वजूद (My Existence) 🔥✊
आँधियाँ लाख आएँ, मैं अपनी जगह से हिला नहीं,
मैं वो पेड़ हूँ, जो तूफानों से कभी मिला नहीं।
मेरे सर को झुकाने की हसरत लिए बैठे हैं सब,
मगर मेरी गर्दन में, झुकने का कोई सिलसिला नहीं।
मैं अपनी पहचान ...
मैं वो पेड़ हूँ, जो तूफानों से कभी मिला नहीं।
मेरे सर को झुकाने की हसरत लिए बैठे हैं सब,
मगर मेरी गर्दन में, झुकने का कोई सिलसिला नहीं।
मैं अपनी पहचान ...
Nazm
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वापसी
सुनो शहर...
अब अपने इन ऊँचे मकानों की खिड़कियाँ बंद कर लो,
क्योंकि वह 'शायर',
जो तुम्हारी सड़कों पर लफ़्ज़ ढूंढता फिरता था,
आज अपना कलम तोड़कर जा रहा है।
बहुत जी लिया इन पत्थरों के बीच,
यहाँ भीड़ तो ब...
अब अपने इन ऊँचे मकानों की खिड़कियाँ बंद कर लो,
क्योंकि वह 'शायर',
जो तुम्हारी सड़कों पर लफ़्ज़ ढूंढता फिरता था,
आज अपना कलम तोड़कर जा रहा है।
बहुत जी लिया इन पत्थरों के बीच,
यहाँ भीड़ तो ब...
Ghazal
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🚬 सिगरेट और वफ़ा 🚬
तेरी यादें जब भी सीने में शोर मचाती हैं,
मैं ख़ामोशी से एक सिगरेट जला लेता हूँ।
तेरे होठों की तलब, अब कहाँ पूरी होती है?
अब तो इस जलती हुई 'लौ' को, मुँह से लगा लेता हूँ।
तू तो छोड़ गई थी मुझे, आ...
मैं ख़ामोशी से एक सिगरेट जला लेता हूँ।
तेरे होठों की तलब, अब कहाँ पूरी होती है?
अब तो इस जलती हुई 'लौ' को, मुँह से लगा लेता हूँ।
तू तो छोड़ गई थी मुझे, आ...