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Explore our collection of 82 beautiful poems

Nazm Start Reading

मौत की राजधानी

ये कैसा 'कोहरा' है जो अब छंटता नहीं,
सूरज भी अब इस शहर में निकलता नहीं।
हवाओं में यह कैसी ज़हर की मिलावट है,
साँस लेना भी अब तो, एक बगावत है।

सुनों ए तख्त पर बैठे हुए 'सियासत के खुदाओ',
जरा शीश...
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दर्द का कोई बाज़ार नहीं

हुनर लफ़्ज़ों का बाज़ार में बिक सकता है बेशक,
मगर एहसास का दुनिया में कोई बाज़ार नहीं होता।
ये वो दौलत है जो रूह के जलने से मिलती है,
शायर कभी साँचे में ढल कर तैयार नहीं होता।
कलम घिसने से अगर कोई...
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शायरी की दुकान नहीं होती

​लफ़्ज़ों को जोड़ना तो बस एक हुनर है दुनिया का,
मगर याद रखना, एहसास की कोई दुकान नहीं होती।
​कलेजा चाहिए होता है लफ़्ज़ों में आग भरने को,
हर किसी के मुँह में ऐसी तासीर-ए-ज़ुबान नहीं होती।
​ये वो दौलत है...
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आखिर कौन हो तुम?

मेरे दिल में गूँजता हुआ, एक सवाल हो तुम,
हकीकत हो मेरी, या सिर्फ एक खयाल हो तुम।
कभी लगता है कि सदियों पुरानी पहचान है तुमसे,
कभी लगता है कि बिल्कुल ही, अनजान हो तुम।
मेरे सूने से दिल में मचा, एक ...
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जीना सीख लिया

ठोकरें खाकर हमने सँभलना सीख लिया,
भीड़ में रहकर भी अकेले चलना सीख लिया।

कोई सुनता नहीं यहाँ चीखें किसी के दिल की,
हमने अब अपने दर्दों को सहना सीख लिया।

बहुत देखे हैं गिरगिट की तरह रंग बदलते लो...
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भरोसा मर गया

वो शख्स जो कभी जान था, दिल से उतर गया,
जब काम निकल गया, वो वादे से मुकर गया।

काँच की तरह सँभाल के रखा था रिश्ता हमने,
एक ठेस लगी और सब कुछ बिखर गया।

भीड़ में तो दिखता हूँ मैं हँसता हुआ मगर,
क...
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छोड़ दिया

हमने अब लोगों को मनाना छोड़ दिया,
हर बात पर सफाई देना और बताना छोड़ दिया।

परख लिया है हमने इस मतलबी ज़माने को,
अब गैरों को अपना बनाना छोड़ दिया।

लोग तमाशा बनाते हैं अक्सर जज़्बातों का,
इसलिये...
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वादे

जो किए ही नहीं कभी मैंने
वो भी वादे निभा रहा हूँ मैं
मुझसे फिर बात कर रही है वो
फिर से बातों में आ रहा हूँ मैं
Kavita Start Reading

नज़रिये की बात

कभी ब्राह्मण प्यासा भी हो सकता है
शूद्रों का अपना कुआँ भी हो सकता है
​धुँध समझकर मास्क मत हटाना
देश की हवा में धुआँ भी हो सकता है
​जिस गंगा में तुम अपने पाप धो रहे हो
उसका पानी अछूत का छुआ भी हो ...
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किरदार निभाना पड़ता है

दर्द दिल में हो मगर होंठों से मुस्कुराना पड़ता है,
इस दुनिया के डर से अपना ग़म छुपाना पड़ता है।

यहाँ कोई नहीं समझता खामोशियाँ किसी की,
हाल-ए-दिल लफ़्ज़ों में सबको बताना पड़ता है।

ये ज़िन्दगी एक ...
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मिट्टी का वजूद

उम्र गुज़ार दी हमने मकान सजाने में,
वक़्त ही न मिला खुद को बसाने में।

पेट की भूख ने ये कैसा हुनर सिखा दिया,
खिलौना बन गया इंसान रोटी कमाने में।

वो शख्स जो कहता था मेरा कद है आसमान जैसा,
ढेर म...
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काँच का तोहफा न देना कभी

काँच का तोहफा न देना कभी, रूठ कर लोग 'तोड़' दिया करते हैं,
जो बहुत अच्छे हों, उन्हें अक्सर लोग 'छोड़' दिया करते हैं।